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यूरोपीय और नासा के अंतरिक्ष यान ने ली सूरज की अब तक की सबसे नजदीकी तस्वीरें

ज्ञानिकों ने सौर ऑर्बिटर द्वारा ली गई तस्वीरों को जारी किया

नई दिल्ली: कोरोना महामारी ने सौर ऑर्बिटर के वैज्ञानिकों को महीनों तक घर से काम करने के लिए मजबूर किया है. जर्मनी के डार्मस्टाड में नियंत्रण केंद्र के अंदर किसी भी समय केवल कुछ इंजीनियरों को ही अनुमति दी जाती है.

इसी के मद्देनजर एक यूरोपीय और नासा के अंतरिक्ष यान द्वारा केप ऑरनेवरल से फरवरी में लॉन्च किए गए सौर ऑर्बिटर द्वारा सूरज की अब तक की सबसे नजदीकी तस्वीरें ली गई. इस तस्वीर में हर जगह अनगिनत छोटे “कैम्पफायर” दिखाई दे रहे हैं.

ऑर्बिटर सूरज से लगभग 48 मिलियन मील (77 मिलियन किलोमीटर) दूर था, पृथ्वी और सूरज के बीच का लगभग आधा हिस्सा है, जब उसने पिछले महीने सूरज की हाई-रिजॉल्यूशन वाली तस्वीरें लीं.

नासा का पार्कर सोलर प्रोब सौर ऑर्बिटर की तुलना में सूरज के बहुत करीब उड़ रहा है – कैमरों के लिए सूरज की सुरक्षित रूप से तस्वीर लेने के लिए भी करीब. इसका अकेला कैमरा सौर हवा का निरीक्षण करने के लिए सूर्य के विपरीत दिशा में देख रहा है.

यही कारण है कि सोलर ऑर्बिटर की नई तस्वीरों में पीले और गहरे धुएं के रंग की लहरों को दिखाया गया है. सूर्य की इतनी नजदीकी और इतने छोटे पैमाने पर खींची गईं ये तस्वीरें काफी कीमती हैं. यूरोपीय अंतरिक्ष एजेंसी के परियोजना वैज्ञानिक डैनियल मुलर ने कहा कि टीम को इन छोटे-छोटे भड़कने वाले विस्फोटों के नामों को रखने के लिए एक नई शब्दावली तैयार करनी थी.

सूरज की इन तस्वीरों को कैप्चर करने वाले उपकरण के प्रमुख वैज्ञानिक और बेल्जियम के रॉयल ऑब्जर्वेटरी के डेविड बर्गमान्स ने कहा कि वह तो चकित रह गए थे. उन्होंने कहा कि उनकी पहली प्रतिक्रिया थी, “यह संभव नहीं है. यह इतना अच्छा नहीं हो सकता.”

इस बारे में बर्गमान्स ने आगे कहा, “यह वास्तव में हमारी उम्मीद से बहुत बेहतर था, लेकिन हम ऐसे ही कुछ की उम्मीद करने की हिम्मत कर रहे थे.”

बर्गामन्स ने कहा, “ये तथाकथित कैम्पफायर, सचमुच हम हर जगह देखते हैं. अभी तक अच्छी तरह से समझा नहीं गया है, वे मिनी विस्फोट हो सकते हैं, या नैनोफ़्लेर हो सकते हैं. इनके अधिक पड़ताल की योजना बनाई गई है.”

मिशन के दौरान आने वाले दिनों में 1.5 बिलियन डॉलर का अंतरिक्ष यान अपनी कक्षा को झुका देगा, जिससे सूर्य के ध्रुवों के बारे में अभूतपूर्व जानकारियां मिलेंगी. उस पोजिशन पर इसे सौर ध्रुवों की पहली तस्वीरों को खींचने में भी मदद मिलेगी.

सोलर ऑर्बिटर दो साल में सूरज के और भी करीब पहुंच जाएगा. मुलर ने कहा, “यह सौर ऑर्बिटर की लंबी यात्रा की शुरुआत है.”

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