70 साल के बाद भी बुनियादी सुविधाओं से अछूता है ये गाँव, शासन के लाभों से वंचित

ऋषिकेश मुखर्जी

धरमजयगढ़ :

जनपद पंचायत धरमजयगढ़ की 30 किलोमीटर दूर पर स्थित ग्राम पंचायत पेलमा के आश्रित ग्राम गुड़ाआमा अपनी मूलभूत सुविधाओं के अभाव से आज भी वंचित है,

यहां निवासरत 25 से 30 परिवार जिनकी जनसंख्या 200 से 250 की है, आज भी शासन की कई लाभों से वंचित हैं।

पेलमा ग्राम पंचायत के आश्रित ग्राम गुड़ाआमा में मुख्य रूप से राष्ट्रपति के दत्तक पुत्र कहे जाने वाले विशेष पिछड़ी जनजाति पहाड़ी कोरवा की संख्या अधिक है,

यह विशेष लुप्तप्राय जनजाति मार्ग के अभाव से मुख्य मार्ग से अछूते हैं, व इन जंगलों के बीच रह गुजर करने को मजबूर से हैं।

केंद्र व राज्य में बैठे सत्ताधारी विकास के कई पूल खड़ा कर दिए किंतु इन पिछड़ी जनजातियों के लिए आज तक आवागमन के लिए सड़के बनी ही नहीं, न निवास के लिए मकान बने और न पीने को स्वच्छजल की व्यवस्था की गई,

जाने ऐसी कई समस्याओं से जूझते यहां के निवासरत ग्रामीण नदी नाला पार कर अपनी आवश्यकताओं के वस्तुओं के लिए इन नदी-नालों को बरसात के दिनों भारी उफान को पार कर जान जोखिम में डालकर ग्राम पंचायत पेलमा आकर अपनी आवश्यकता की पूर्ति करने में मजबूर होते हैं।

यहां की विद्युत व्यवस्था की अगर बात करें तो राजीव गांधी विद्युतीकरण के तहत खम्बा गाड़कर तार लटका दिए गए हैं। जो कि मात्र नमुना बनकर रह गया है।

आज तक यहां रोशनी नही पहुँची है, निवासरत भोले भाले ग्रामीण मूलभूत सुविधाओं को लेकर अपने कथा-व्यथा आखिर किससे कहें, और इनकी आखिर सुनने वाला है कौन?

आज के इस आधुनिक सुख सुविधाओं से लैस होने के बावजूद भी यहां के निवासरत ग्रामीण विकास के बाट जोहने को मजबूर है।

स्वच्छ भारत मिशन की बात करें तो यहां के भोले भले जनता शौचालय के नाम से भी अज्ञान हैं, इन्हें शौचालय के बारे में भी जानकारी नहीं है, और आज तक इन परिवारों के लिए शौचालय का निर्माण पंचायत की ओर से नहीं कराया गया है।

इस विषय पर जब पूर्व में मुख्य कार्यपालन अधिकारी आज्ञा मणि पटेल से चर्चा किया गया तो उन्होंने बताया कि धरमजयगढ़ जनपद पूर्ण रूप ओडीएफ हो चुका है,

किंतु यह कैसा ओडीएफ जहां एक ओर एक ग्राम पंचायत के 200 से 250 परिवार के लिए एक भी शौचालय का निर्माण नहीं और पूरे जनपद को ओडीएफ का घोषणा कर देना वह भी मात्र कागजों पर।

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