छत्तीसगढ़

आदेश के बाद भी बिलासपुर में नहीं खुल पाएंगे 50 कोचिंग सेंटर, हास्टल भी बंद

कोरोना महामारी ने संस्थानों को तगड़ा नुकसान पहुंचाया है।

ब्यूरो चीफ विपुल मिश्रा
बिलासपुर।जिला प्रशासन की अनुमति के बाद भी न्यायधानी के कई कोचिंग सेंटर नहीं खुल पाएंगे। कोरोना महामारी ने संस्थानों को तगड़ा नुकसान पहुंचाया है। जिस वजह से हमेशा के लिए यहां ताला लग चुका है। किराया,मेंटेनेंस,फेकेल्टी को वेतन और आदि खर्च बड़ी वजह है। वहीं अब तक हास्टल नहीं खुलने के कारण छात्रों को किराए के मकान पर रहना पड़ रहा है।

कोचिंग सेंटर संचालकों ने एक दिन पूर्व कलेक्टर के नाम ज्ञापन सौंपकर संस्थानों को खोलने अनुमति मांगी थी। देर रात उन्हें कोविड-19 के दिशा निर्देशों के मुताबिक 50 फीसद छात्र-छात्राओं के साथ अनुमति भी मिली। मगर समस्या अब भी कम नहीं हुई है। जिले में लगभग ढ़ाई सौ कोचिंग सेंटर है। अधिकांश नहीं खुल पाएंगे। जिसकी बड़ी वजह आर्थिक संकट के कारण तालाबंदी है। एरिना एनीमेशन के डायरेक्टर संदीप गुप्ता का कहना है कि 11 महीनें से संस्थान बंद है। बिजली बिल, मकान का किराया, स्टाफ को पेमेंट, शिक्षकों का वेतन के अलावा अन्य खर्च वहन करना आसान नहीं था।

लिहाजा 2021 के पहले ही 50 से अधिक सेंटर बंद हो गए थे। करियर पाइंट के संचालक किरणपाल चावला ने कहा कि संकटकाल में संस्था को बचाने के साथ बच्चों का भविष्य निर्माण एक कठिन चुनौती थी। बैंक लोन से लेकर सुविधा, संसाधन और अधोसंरचना को बचाना मुमकिन नहीं था। पालकों के विश्वास और कर्मचारियों के सहयोग से काफी हद तक संभलने में कामयाब हुए है।

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