छत्तीसगढ़

वाद- विवाद, चित्रकला एवं व्याख्यान कार्यक्रम का हुआ आयोजन

मनराखन ठाकुर

पिथौरा।

सबका देश हमारा देश केम्पेन के अंतर्गत अखिल भारतीय जन विज्ञान नेटवर्क के आह्वान पर देश भर में किए जा रहे कार्यक्रमों की श्रृंखला में भारत की प्रथम महिला शिक्षिका सावित्रीबाई फुले की जयंती पर छत्तीसगढ़ विज्ञान सभा पिथौरा व इकाई द्वारा वाद- विवाद , चित्रकला एवं व्याख्यान कार्यक्रम का आयोजन किया गया।

शासकीय उच्च प्राथमिक शाला कसहीबाहरा में किया गया। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि साहू अकादमी की निदेशक डॉ डी साहू थी ।कार्यक्रम की अध्यक्षता शिक्षिका तबस्सुम ने की। विशेष अतिथि के रूप में विज्ञान सभा पिथौरा इकाई के संरक्षक डॉ डी एन साहू तथा दिव्यांग मित्र मंडल पिथौरा के संयोजक व हौसले की पाठशाला के मार्गदर्शक बीजू पटनायक उपस्थित थे। कार्यक्रम का शुभारंभ अतिथियों द्वारा सावित्रीबाई फुले की छाया चित्र पर दीप प्रज्वलित कर किया गया।

ततपश्चात छत्तीसगढ़ विज्ञान के संयुक्त सचिव छत्तीसगढ हेमन्त खुटे ने कार्यक्रम के उद्देश्य पर प्रकाश डालते हुए कहा कि इस कार्यक्रम का उद्देश्य महिला शिक्षण की प्रगति का आंकलन करना है तथा विज्ञान एवं उच्च अध्ययन के क्षेत्र में महिलाओं की भागीदारी को प्रेरित करना है।

आगे हेमन्त ने सावित्रीबाई फुले के जीवन चरित्र पर प्रकार लगते हुए कहा कि भारत की पहली महिला शिक्षिका जिन्होंने बालिका शिक्षा को बढ़ावा देते हुए घर की दहलीज को लांघकर आधुनिक शिक्षा प्रणाली का आगाज किया था।

विशिष्ट अतिथि बीजू पटनायक ने अपने व्याख्यान में कहा कि नारी शिक्षा को बढ़ावा देने सामाजिक विरोध होने के बावजूद सावित्रीबाई फुले ने तिरस्कार को सहन करते हुए भी अध्यापन कार्य किया ।उन्होंने बालिका शिक्षा को बढ़ावा देते हुए 18 स्कूल खोला ।नारी शिक्षा के लिए उनका योगदान अतुलनीय।

विशिष्ट अतिथि डॉ डी एन साहू ने कहा कि जब सावित्रीबाई फुले स्कूल पढ़ाने जाती थी तो उनके ऊपर गांव वाले पत्थर और गोबर फेंकते थे बावजूद इसके उन्होंने दृढ़ निश्चय के साथ अध्यापन कार्य जारी रखा और बालिकाओं को शिक्षित करते हुए शिक्षा की ज्योत जलाये रखा। उनका मानना था कि शिक्षा के बिना आदमी जानवर की भांति हो जाता है।

कार्यक्रम की मुख्य अतिथि डॉ डी साहू ने अपना विचार प्रकट करते हुए कहा कि सावित्रीबाई न केवल देश की पहली महिला शिक्षिका थी बल्कि उन्हें देश की पहली बालिका स्कूल की स्थापना करने का श्रेय भी जाता है ।सावित्रीबाई एक शिक्षण सुधारक और समाज सुधारक दोनों ही तरह का काम करती थी।

शिक्षिका तबस्सुम ने अपने अध्यक्षीय उदबोधन में कहा कि सावित्रीबाई जाति भेद नहीं करती थी। यही कारण था कि उन्होंने सभी जातियों के लिए अपने स्कूल का दरवाजा खुला रखा। हर बिरादरी और धर्म के लिए उन्होंने काम किया। भारत में महिलाओं के अधिकारों को विकसित करने में उनका महत्वपूर्ण योगदान है। उनका संपूर्ण जीवन महिलाओं के अधिकारों के लिए संघर्ष में बीता।सावित्रीबाई देश की महानायिका है।

इस अवसर पर चित्रकला स्पर्धा में शामिल स्कूली बच्चों को श्रेष्ठ चित्रकला हेतु पुरस्कृत किया गया। पुरस्कृत छात्र- छात्राओं में बिंदिया, विजयालक्ष्मी ,दामिनी ,लक्ष्मी ,प्रमोद व भूपेंद्र शामिल है। इन सभी बच्चों को प्रमाण पत्र अथितियों ने अपने कर कमलों से प्रदाय किया।

बालिका शिक्षा को बढ़ावा देने हेतु साहू अकादमी की निदेशिका डॉ डी साहू को एनपीजी स्मृति फाउंडेशन पिथौरा द्वारा सावित्रीबाई फुले सम्मान से नवाजा गया । अंत में सभी बच्चों को शिक्षा प्रोत्साहन हेतु अतिथियों ने कॉपी व पेन स्नेह से दिया।

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