पुन्नालाल बख्शी की 125 वीं जयंती पर इंदिरा कला में कार्यक्रम का हुआ आयोजन

कार्यक्रम में कई वरिष्ठ लोग थे मौजूद

खैरागढ़- आचार्य पदुमलाल पुन्नालाल बख्शी की 125 वीं जयंती पर बख्शी सृजन पीठ भिलाई एवं इंदिरा कला संगीत विष्वविद्यालय, खैरागढ़ के संयुक्त आयोजन में प्रदेश स्तरीय एक कार्यक्रम 27 मई को विश्वविद्यालय के सभागार में सम्पन्न हुआ। उक्त कार्यक्रम के अध्यक्ष प्रो. डॉ. माण्डवी सिंह, कुलपति इंदिरा कला संगीत विश्वविद्यालय,, खैरागढ़, विशिष्ठ अतिथि लाल रामकुमार सिंह वरिष्ठ संस्कृति विद् एवं आकाशवाणी के उदघोषक, डॉ. नलिनी श्रीवास्तव वरिष्ठ कथाकार भिलाई, शंशाक शर्मा संचालक छत्तीसगढ़ राज्य हिन्दी ग्रंथ अकादमी रायपुर एवं आर्चाय रमेन्द्रनाथ मिश्र अध्यक्ष, बख्शी सृजन पीठ भिलाई थे।

कार्यक्रम के आरंभ में अतिथियों द्वारा आचार्य बख्शी एवं राजकुमारी इंदिरा के चित्र पर माल्यार्पण एवं दीप प्रज्ज्वलन किया गाय। आचार्य मिश्र ने अतिथियों का स्वागत साल,श्रीफल एवं पुस्तक भेंटकर किया गया। मिश्र ने बख्शी सृजन पीठ की साहित्यक गतिविधियों की जानकारी देते हुए उपस्थित साहित्यकारों एवं शिक्षकों से आग्रह किया कि जीवन की आपाधापी से कुछ समय निकाल कर सृजन भी करें इससे स्वयं का तथा समाज का भला होगा। डॉ. नलिनी श्रीवास्तव ने बताया कि बख्शी ने खैरागढ़ की दिनचर्या, विशिष्टता को अपने साहित्य में स्थान दिया। खैरागढ़ प्रसंग आते ही वे प्रसन्न हो जाते थे।

लाल रामकुमार सिंह ने बताया कि बख्शी विद्यार्थियों को रोचक ढंग से पढ़ाते थे और उन्हें पाठ्यक्रमों से बाहर की पुस्तकें देकर पढ़ने के लिए प्रेरित करते थे। विजय ओसवाल उनके प्रिय शिष्य थे।
शंशाक शर्मा ने खैरागढ़ में बिताये अपने बचपन को याद करते हुए बताया कि बख्शी हिन्दी साहित्य के सर्वाधिक प्रौढ़काल के रचनाकार थे। वे हाशिये पर कभी नहीं रहे किसी न किसी कक्षा के वे पठनीय साहित्यकार तब भी थे और आज भी हैं।

अध्यक्षीय उद्दबोधन में प्रो. माण्डवी सिंह जी ने बख्थी के शिक्षकीय दायित्व का विशेष उल्लेख किया। उन्होंने बताया कि बख्शी विद्यार्थियों के लिए स्वयं को तैयार करते थे। वे आज भी शिक्षकों के लिए अनुकरणीय हैं। मातृभूमि से लेकर जीव-जगत पर साहित्य रचना करने वाले बख्शी का साहित्य चरित्र को उद्घाटित करने वाला है।

इस कार्यक्रम में प्रो. काषीनाथ तिवारी, प्रो. गोरेलाल चंदेल, प्रो. नीता गहरवार, डॉ. जीवन यदुराही, अजय ओसवाल, अषोक ओसवाल, अनिला सिंह, विनयषरण सिंह, डॉ. साधना अग्रवाल, विजय सिंह, डॉ. आषुतोश चैरे, लिकेश्वर वर्मा, कपिल सिंह वर्मा, दिनेष देवदास, डॉ. दीपशिखा पटेल, गोपाल यादव, रविन्द्र अग्रवाल, अषोक सिंह, देवेन्द्र महोबे, सुनील शर्मा, कमलेश सिंह, मानस मणि साहू, रघुनाथ सिन्हा, दिनेश देवदास, प्रकाश गायकवाड़, आलोक सिंह, डीसी जैन के अलावा छुईखदान, बैहर, राजिम, रायपुर तथा भिलाई के साहित्यकार एवं शिक्षक बड़ी संख्या में उपस्थित थे। कार्यक्रम का संचालन प्रो. राजन यादव ने एवं आभार व्यक्त शिवनाथ शुक्ला वरिष्ठ पत्रकार व कथाकार भिलाई ने किया।

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