हर दिन भूखे सोने को मजबूर देश के 19.5 करोड़ के आसपास की आबादी

देश की आबादी के तकरीबन 14.8 फीसदी लोग भूख की समस्या के शिकार

नई दिल्ली:देश की आबादी के तकरीबन 14.8 फीसदी लोग भूख की समस्या के शिकार हैं. यह संख्या 19.5 करोड़ के आसपास है. ये ऐसे लोग हैं जो हर दिन भूखे सोने को मजबूर हैं. देश में भूख की इस समस्या पर सुप्रीम कोर्ट में एक जनहित याचिका (पीआईएल) दायर की गई है.

सामाजिक कार्यकर्ता अनून धवन की ओर से दायर पीआईएल में स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय की एक रिपोर्ट का हवाला दिया गया है.

रिपोर्ट के मुताबिक, 2017-18 में हर दिन 19 करोड़ से ज्यादा लोग भूखे सोने को मजबूर थे. रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि 2015-16 में 15-49 आयु वर्ग के 23 फीसदी पुरुष और 53 फीसदी महिलाएं एनिमिया (खून की कमी) के शिकार थे.

भूख की भयावह समस्या

रिपोर्ट के अनुसार, 5 साल से कम उम्र के 21 फीसदी बच्चे अपनी लंबाई के अनुपात में काफी ज्यादा दुबले-पलते थे. यह आंकड़ा विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्लूएचओ) के स्टैंडर्ड के मुताबिक जारी किया गया है. बच्चों की यह दशा गंभीर कुपोषण की ओर इशारा करती है.

पीआईएल में बताया गया है कि सरकार ने साल 2015-16 में इस मद में 1.15 लाख करोड़ रुपये खर्च किए हैं. इसके साथ ही 2018-19 में पीडीएस के लिए 1.74 लाख करोड़ रुपये आवंटित किए गए.

इसी अवधि में सिर्फ खाद्य सब्सिडी के लिए सरकार ने 1.69 लाख करोड़ रुपये जारी किए. पीआईएल के मुताबिक, इतना कुछ के बावजूद मौजूदा ऑपरेशनल स्कीम को लागू कराने में गंभीर खामियां हैं.

पीआईएल में कोर्ट से इस मामले में दखल देने की गुजारिश की गई है ताकि शहरी गरीबों और बेघरों को गर्म खाना बांटा जा सके. इसके लिए झारखंड के मुख्यमंत्री दाल भात योजना, तमिलनाडु के अम्मा किचन, आंध्र प्रदेश के अन्ना किचन और ओडिशा के आधार कैंटीन का हवाला दिया गया है.

सरकारों को कोर्ट से नोटिस

बीते 2 सितंबर को केंद्र सरकार को जारी एक नोटिस में सुप्रीम कोर्ट ने पूछा कि क्या शहरी गरीबों के लिए सामुदायिक किचन जैसी कोई राष्ट्रीय योजना लागू की जा सकती है. इसके जवाब में केंद्र सरकार ने अदालत से कहा कि यह मामला राज्य सरकारों का है कि वे खाद्य वितरण स्कीम को कैसे लागू करते हैं.

23 अक्टूबर को इस मामले की फिर सुनवाई हुई जिसमें जस्टिस एनवी रमना, संजीव खन्ना और कृष्ण मुरारी की पीठ ने सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों से पीआईएल पर जवाब मांगा है.

तीन जजों की बेंच ने केंद्र और राज्य सरकारों से इस बाबत 4 हफ्ते के अंदर जवाब देने को कहा है. शहरों में भूख और कुपोषण की समस्या से निपटने के लिए नेशनल फूड ग्रिड और फूड डिस्ट्रीब्यूशन सिस्टम बनाने जैसे कदमों पर शीर्ष अदालत ने जवाब तलब किया है.

Back to top button