छत्तीसगढ़

यहाँ रोज-रोज हर रोज, होता है कोई न कोई “हादसा”

ब्यूरो चीफ : विपुल मिश्रा

रायपुर – राजधानी में अपराध का ग्राफ तेजी से बढ़ रहा है ! एक के बाद एक आपराधिक घटनाओं से राजधानीवासी दहशत में है ! पिछले एक माह में हत्या,चाकूबाजी तथा लुटपाट की घटनाओं ने पुलिस की नींद हराम कर दी है ! इन घटनाओं से राजधानी में कानून व्यवस्था की स्थिति पर गंभीर सवाल उठने लगे हैं !

पिछले 30 दिनों में हत्या की 9 वारदातें हुईं। जानलेवा हमले के चार केस दर्ज किए गए। 53 ऐसी वारदातें हुईं, जिनमें युवकों को गंभीर चोटें आईं। आंकड़े इसलिए चौंकाने वाले हैं, क्योंकि हत्या और मारपीट की सभी वारदातों में चाकू का उपयोग हुआ है।

पुलिस ने ज्यादातर मामलों में आरोपियों को दबोच भी लिया है। इतनी घटनाओं में इक्का-दुक्का को छोड़कर कोई भी वारदात सुनियोजित नहीं थी। मरने वाले भी आराेपियों के परिचित या दोस्त ही हैं। यानी छोटे-छोटे विवाद में क्षणिक आवेश में आकर युवकों ने चाकू निकाला और अपने ही दोस्त या परिचित की हत्या कर दी।

चाकूबाजी की इन घटनाओं ने पुलिस के साथ अस्पताल के डाक्टरों को भी चौंका दिया है। ऐसा पहली बार हो रहा है, जब अंबेडकर अस्पताल के ट्रामा सेंटर में ही रोज औसतन 5-6 केस चाकू से घायल वाले पहुंच रहे हैं।

पुलिस के अधिकारी भी मान रहे हैं कि 15 से 25 साल की उम्र के युवक छोटी-छोटी बात पर चाकू निकाल रहे हैं। पुलिस ने हालांकि चाकूबाजी की वारदातों को रोकने मुहिम चलायी है। रोज शाम शहर के अलग-अलग स्पॉट पर अड्‌डेबाजी करने वालों को दबोचकर उनकी जांच की जा रही है।

पिछले चार दिन से चल रही चेकिंग में 70 से ज्यादा युवकों के पास चाकू या धारदार हथियार मिला। ज्यादातर युवकों ने बटन चाकू रखा था। किसी ने कमर में तो किसी ने बेल्ट से बांध रखा था। पुलिस ने पकड़ने के बाद उनसे पूछताछ की तो कोई भी नहीं बता सका कि आखिर वह हथियार लेकर क्यों घूम रहा है।

पुलिस के आला अफसरों के अनुसार कुछ ऐसे युवकों के पास हथियार मिले, जिनका कोई पिछला रिकार्ड नहीं है। उनकी काउंसिलिंग कर पूछा जा रहा है कि आखिर वे ऐसे खतरनाक हथियार लेकर क्यों घूम रहे हैं।

डॉक्टर भी हैरान, ऐसा क्यों

अंबेडकर अस्पताल के ट्रामा सेंटर के डाक्टरों से चर्चा करने पर उन्होंने हैरानी जतायी। डाक्टरों ने बताया कि वे खुद अचरज में हैं कि चाकूबाजी के इतने केस कैसे आ रहे हैं। डाक्टरों का कहना है कि इलाज के दौरान वे अक्सर मरीजों से बात करते हैं, ताकि उनका ध्यान भटकाया जा सके। उन्होंने हाल के दिनों में जितने भी घायलों से उन पर हमला करने वालों के बारे में पूछा, उन्होंने यही बताया कि दोस्त है डाक्टर साहब। बस पीते पीते पुरानी बात निकल गई और सीधे चाकू मार दिया।

सबसे ज्यादा टिकरापारा में घटना

पिछले महीने नवंबर में टिकरापारा में हत्या के दो और जानलेवा हमले की दो घटना हुई हैं। जबकि इस महीने भी बोरियाखुर्द में एक नाबालिग की चाकू से गोदकर हत्या कर दी गई। इसका वीडियो भी खूब वायरल हो रहा है। इसके अलावा पिछले महीने पुरानी बस्ती, डीडी नगर, सरस्वती नगर, सेजबहार, माना और मंदिर हसौद में एक-एक हत्या की घटना हुई है। कबीर नगर, टिकरापारा, गुढियारी, सिविल लाइंस में हत्या का प्रयास हुआ है, जबकि 31 थानों में 53 चाकूबाजी और नुकीले हथियार से हमला हुआ है।

दोस्त को मारा चाकू

टिकरापारा में 30 साल व 25 साल के युवाओं के बीच गांजे को लेकर झगड़ा हो गया। चार दोस्त पार्टी मनाने बैठे थे। इस दौरान एक दोस्त ने ज्यादा गांजा ले लिया। दूसरे ने गुस्से में आकर युवक के पेट में चाकू घोंप दिया।

“पहले की तुलना में चाकूबाजी में घायल मरीजों की संख्या बढ़ी है। यह पड़ताल करने वाली बात है कि आखिर ऐसा क्यों हो रहा है? कुछ मरीजों को इमरजेंसी में सर्जरी की जरूरत भी पड़ती है।”
-डॉ. मंजू सिंह, एचओडी सर्जरी अंबेडकर अस्पताल

“पिछले महीने चाकूबाजी की घटनाओं में कमी आई है। पुलिस ने 553 चाकूबाजों की सूची बनाई है। कुछ नए लोगों का नाम जोड़ा गया है। रोज पुलिस अलग-अलग इलाकों में जांच करके बदमाशों को पकड़ रही है।”
-लखन पटले, एएसपी सिटी

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