छत्तीसगढ़

मानवता की मिसाल : मरीजों के बीच भरोसे की मिसाल बनते कोविड वारियर डॉ. प्रकाश

दशकों से नगर मे ज्यादातर आबादी के लिए डाक्टर का मतलब ही डॉ.प्रकाश मिश्रा माना जाता है।

हिमालय मुखर्जी ब्यूरो चीफ रायगढ़

रायगढ़  : कोरोना के खिलाफ जंग मे चिकित्सा जगत पहली पंक्ति मे खड़ा है।परिवार की परवाह किये बगैर स्वास्थ्यकर्मी दिन रात अपने कर्तव्य का निर्वहन कर रहे हैं।कर्तव्य की बेड़ियों मे जकड़े इन चिकित्सकों ने कोरोना महामारी के नियंत्रण व बचाव मे जो किया है,उसे शब्दों मे बयां नहीं किया जा सकता। इन्ही पहली पंक्ति के कोविड वारियर मे कुछ ऐसे चिकित्सक भी शामिल हैं जिन्होने मरीजों की सेवा के दौरान उनके इलाज से बढ़कर निराशावादी सोच को खत्म कर उम्मीदों का संचार किया है।

पीड़ित मानवता की सेवा की ऐसी ही एक मिसाल न केवल जिले बल्कि प्रदेश के मशहूर चिकित्सा विशेषज्ञ डॉ. प्रकाश मिश्रा ने पेश की है।डॉ.मिश्रा ने अपने चिकित्सकीय पेशे को कुछ इस तरह से निभाया है कि दशकों से नगर मे ज्यादातर आबादी के लिए डाक्टर का मतलब ही डॉ.प्रकाश मिश्रा माना जाता है।

डॉ.प्रकाश मिश्रा ऐसे चिकित्सक

विराट मानवीय गुणों से सम्पन्न व्यक्तित्व डॉ.प्रकाश मिश्रा ऐसे चिकित्सक हैं जिनके स्वभाव मे ही सेवा भाव झलकता है।एक तरफ जहां डाक्टरी का पेशा अपने मूल यानि सेवाभाव से कमाई के जरिये के रुप मे ढल गया है और ईलाज से ज्यादा ध्यान मरीजों के जेब की तरफ केन्द्रित हो चला है,ऐसे दौर मे डॉ. प्रकाश मिश्रा की चिकित्सकीय दायित्वों का ईमानदार निर्वहन समाज मे डाक्टरी ईलाज के भरोसे की मिसाल बन रहा है।

डॉ.मिश्रा चिकित्सा को सेवा का माध्यम मानकर निभाते चले आ रहे हैं।उनके पेशे की साफगोई का इससे बेहतर उदाहरण नहीं मिल सकता कि चक्रधर नगर स्थित डॉ.मिश्रा के क्लीनिक पर रजिस्ट्रेशन की पर्ची बनाकर शुल्क वसूलने का रिवाज नहीं है। मरीज यहां आते हैं,ईलाज कराते हैं और सामर्थ्य के अनुरुप शुल्क अता कर जाते हैं।पहली बार मे ही मर्ज की पहचान कर संतोषजनक ईलाज और मरीजों का सम्मान डॉ.मिश्रा के क्लीनिक की ऐसी खासियत है जिसके कारण शहर मे दर्जनों क्लीनिक होने के बावजूद भरोसेमंद इलाज के प्रति मरीजों का विश्वास डॉ. प्रकाश मिश्रा के ईलाज पर सबसे ज्यादा निर्भर देखा गया है।

जिले का एकमात्र उनके मेट्रो हॉस्पिटल मे सामान्य मरीजों के ईलाज के साथ साथ कोविड मरीजों का ईलाज करते हुये डॉ. मिश्रा उनका एलोपैथी के अलावा मनोवैज्ञानिक ईलाज भी कर रहे हैं।दर असल जिले समेत प्रदेश भर मे ग्लानिबस और भयभीत होकर कोविड मरीज आत्मघाती कदम उठा रहे हैं,जिसे समझते हुये डॉ.प्रकाश मिश्रा ने कोविड मरीजों को मनोवैज्ञानिक ढंग से मानसिक मजबूती और सकारात्मक सोच देकर जीने का उत्साह जगाने की कारगर पहल की है।

आत्म-संतुष्टि के साथ प्रेरणा भी

कोरोना महामारी के बढ़ते संक्रमण के बीच जहां लोग अपने घरों मे कैद रहकर भी बिमारी से भयभीत नजर आते हैं वहीं दूसरी तरफ पेशे की तरफ प्रतिबद्ध चिकित्सक वर्ग मरीजों के ईलाज और सकारात्मक रहने की दोहरी चुनौती के साथ आगे बढ़ रहा है।डॉ.प्रकाश मिश्रा भी इसी कड़ी मे अपने बुलंद हौंसले से फर्ज और इंसानियत की नई पटकथा लिख रहे हैं।अपने जज्बे की सराहना के बावजूद डॉ. मिश्रा केवल इतना ही कहते हैं कि जो भी कर पाता हूं सब ईश्वर की इक्षा से संभव है।इन सब चुनौतियों के बावजूद उन्हे अपने सहयोगियों और मरीजों से जो सहयोग मिलता है, वह काफी शक्ति देता है।

उनके मुताबिक कि मरीज जब आपके प्रति आभार व्यक्त करते हैं तो नई ऊर्जा मिलती है। डॉ. मिश्रा कहते हैं कि कोविड-19 के कार्य में अत्यधिक एहतियात बरतना पड़ता है। स्वास्थ्य विभाग की गाईडलाईन सोशल डिस्टेंसिंग,मास्क और सेनेटाइज का जो सख्ती से पालन करेगा वह कोरोना को अवश्य मात देगा।डॉ. मिश्रा के मुताबिक एक भी गलत कदम दूसरों के लिए जोखिमभरा साबित हो सकता है।

डॉ.प्रकाश मिश्रा का कहना है कि एक डॉक्टर को संक्रमित होने का खतरा सबसे ज़्यादा रहता है ऐसे में वह उपायों के शॉर्टकट न अपनाएं बल्कि सही तरीके से प्रिकॉशन लें।रोजाना लगभग तीन से चार सौ मरीजों से घिरे डॉ.मिश्रा अपनी इम्यूनिटी बढ़ाने और रोज की चुनौतियों के लिए मानसिक रूप से तैयार करने के लिए प्रतिदिन सुबह एक घंटा व्यायाम व योग करते हैं। महामारी के खिलाफ फ्रंट कोविड वारियर की भूमिका निभा रहे डॉ.प्रकाश मिश्रा का समर्पित दायित्व निर्वहन पूरे चिकित्सा जगत को खासकर जूनियर डाक्टरों को संकटकाल मे कर्तव्यों के प्रति गंभीर रहने की प्रेरणा दे रहा है।

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