छत्तीसगढ़

आबकारी विभाग निष्क्रिय, अवैध शराब के कोचियों की पौ बारह!

मनीष शर्मा:

मुंगेली: जिले भर में आबकारी महकमे द्वारा लंबे समय से निष्क्रियता ओढ़ ली गयी है और इसका फायदा अवैध शराब का धंधा करने वाले लोग जमकर उठा रहे हैं। इन परिस्थितियों में शांति पसंद आम इंसान परेशान है।

आबकारी विभाग इस बात से जान बूझकर अंजान बना दिख रहा है कि मुंगेली, लोरमी, पथरिया के गांव गांव में अवैध शराब की बिक्री जोरों पर है जब चाहे तब अवैध शराब को पकड़ने की खबरें समाचार माध्यमों से मिल रहीं हैं। आबकारी विभाग के द्वारा खानापूर्ति करने कभी कभार मीडिया के जरिये अपनी पीठ ठोकी जाती है।

अवैध शराब की बिक्री जोरों पर

मुंगेली शहर के अधिकांश लोगों के पास इस बात की जानकारी मिल जायेगी कि हॉटल और ढाबों और गांव गांव में इन दिनों अवैध शराब की बिक्री जोरों पर है। ऐसा नहीं है कि यह बात पुलिस या आबकारी अमले के संज्ञान में नहीं है।

मीडिया की तरफ जब भी ध्यान दिया जाये तब यही जानकारी मिलती है कि देशी और विदेशी शराब अब तक बड़ी तादाद में पुलिस के द्वारा ही पकड़ी जा रही है। यह शोध का ही विषय है कि आखिर आबकारी विभाग के मूल काम को पुलिस के द्वारा अंजाम दिया जा रहा है और आबकारी विभाग आराम से चैन की बंसी बजा रहा है।

यहाँ यह भी उल्लेखनीय होगा कि अवैध शराब के बारे में जनप्रतिनिधियों को कोई लेना-देना नहीं दिखता है। अवैध शराब बिक्री के लिए स्थानीय विधायक पुन्नूलाल मोहले के द्वारा अपने कार्यकाल दौरान एकाध बार भी अवैध शराब के बारे में प्रशासन का ध्यान आकर्षित नही कराया गया जिसके चलते आबकारी विभाग के कानों में जूं नहीं रेंग पा रही है।

शराब सामाजिक बुराई

प्रशासन की जानकारी में यह बात अच्छी तरह से है कि शराब सामाजिक बुराई है और यह बात कई मौकों पर सिद्ध भी हो चुकी है। बताया जाता है कि शराब से प्राप्त होने वाले भारी भरकम राजस्व की सहायता से प्रदेश सरकार के द्वारा अनेकों योजनाओं को अमलीजामा पहनाया जाता है।

ऐसे में वर्तमान में शराब बंदी को लेकर महिला वर्ग का एकतरफा वोट बटोर चुकी भुपेश बघेल की सरकार द्वारा अब संभव प्रतीत नहीं होती है। यहाँ सवाल यही उठता है कि अवैध शराब के जरिये कौन सा राजस्व सरकारी खजाने में जा रहा है?

मुंगेली शहर में शाम ढलते ही शहर में मयजदों की टोलियां लहराती हुईं दिखायी दे जाती हैं। चौक – चौराहों, अण्डों के ठेलों आदि पर मयजदों को डकारें मारते हुए आसानी से देखा जा सकता है। जिला मुख्यालय में शाम ढलने के बाद कोतवाली पुलिस की पेट्रोलिंग भी अब दिखायी नहीं पड़ रही है।

बता दें मुंगेली शहर में शायद ही कोई ऐसा सार्वजनिक स्थान या होटल होगा जिसमें शराब अवैध रूप से न बिक रही हो या जिस ढाबे में दिन या रात में सुरापान करते हुए लोगों को न देखा जाता हो। यक्ष प्रश्न यही है कि इस तरह से अगर बिना किसी लाईसेंस के ढाबों में शराब परोसी जा रही है तो इस नियम विरूद्ध काम को आबकारी विभाग रोकने की कवायाद क्यों नहीं करता है! ऐसे में इन हालातों में क्या आबकारी अमला अपनी रोटी सेंकने में धड़ल्ले से लगा हुआ है।

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