एक्सक्लूसिव- मंडला और गढ़चिरौली में बस्तर के नक्सली कर नए लड़ाकों की भर्ती, पुलिस को मिले इनपुट

फोर्स के बढ़ते दबाव से रणनीति बदलने पर मजबूर हुए हार्डकोर माओवादी-विस्तार दलम का गठन की अफसर भी कर रहे अधिकारिक पुष्टि

जगलपुर।

बस्तर में नक्सलियों के सफाए करने में जुटी छत्तीसगढ़ पुलिस और केंद्रीय सुरक्षा बलों की सटीक प्लानिंग से माओवाद कैडर के बड़े ओहदेदार अपनी रणनीति बदलने पर मजबूर हो रहे हैं। ऐसी ही खबर महाराष्ट् के गढ़चिरौली गोंदिया और मध्य प्रदेश के मण्डला जिले से निकलकर आ रही है। अधिकारिक तौर अफसर भी इस बात की पुष्टि कर रहे हैं।


दरअसल बस्तर के आदिवासियों का नक्सलियों से भंग होता मोह और फोर्स की दबाव की वजह से बस्तर के कांकेर दरभा और महाराष्टÑ के गढ़चिरौली गोंदिया के नक्सलियों के एक तेईस सदस्यी दल ने मध्यप्रदेश में मण्डला जिले मे विस्तार दलम का गठन कर वहां के स्थानीय आदिवासियों को नक्सलवाद से जोड़ना शुरू कर दिया है। इसके पहले भी बालाघाट में पुलिस ने नक्सलवादियों के जब्त सामानों में बस्तर के बीजापुर स्कूली बच्चों के सामान बरामद किए थे।

विस्तार दलम के गठन पर आईजी बालाघाट से जब दूरभाष पर चर्चा की गई तो उन्होंने भी इस खबर की पुष्टि करते हुए कहा कि बालाघाट पुलिस को इस बारे जानकारी है एवं उन नक्सलवादियों की फोटो और डिटेल भी मिल चुके हैं। इधर बस्तर के डीआईजी सुन्दरराज पी का भी कहना है कि बस्तर के बीस नक्सलियों के मण्डला में जाने के इनपुट मिले हैं।

डीआईजी सुन्दरराज पी का कहना है कि वहां की भौगोलिक स्थिती बस्तर जैसी ही हैं, साथ ही नक्सलवादियों की यह रणनीति होती है कि समय-समय पर स्थान बदलते रहें। ताकि फोर्स को गुमराह किया जा सके। माना जाता है कि बस्तर में लगातार हो रहे एनकाउंटर में बड़ी संख्या में मारे जाने, गिरफ्तार होने और आत्मसमर्पण ने नक्सलियों को बस्तर से अन्यन्त्र जाने को विवश कर दिया है।</>

सुंदरराज ने बताया कि चूंकि ओडिश, तेलंगाना और महाराष्ट् पुलिस फोर्स संयुक्त रूप से नक्सलवादियों के खिलाफ अभियान छेडेु हुए है, जिसमे नक्सलवादियों को बड़ी क्षति लगातार हो रही है। अपनी जान बचाने के लिए नक्सलवादियों के पास मप्र और झारखण्ड ही ऐसा क्षेत्र बचा है जहां वे सुरक्षित इलाका तलाश कर अपने संगठन का विस्तार कर सकते हैं। शायद मण्डला का विस्तार दलम उसी दिशा में उठाया हुआ कदम है।

advt
Back to top button