देश में दक्षिण अफ्रीका से चीता लाने की कवायद शुरू

सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद इस प्रक्रिया में तेजी आई

रायपुर: केंद्र सरकार ने वन विभाग को पत्र लिखकर गुरु घासीदास नेशनल पार्क में प्राकृतिक रूप से चीता के रहने और खाने के किस तरह के इंतजाम हैं, वन विभाग से सर्वे कर रिपोर्ट मांगी है। विभाग के अधिकारियों के अनुसार जल्द ही सर्वे का काम पूरा कर लिया जाएगा। ज्ञात हो कि देश में चीता की प्रजाति के खत्म हो गई है।

देश में चीता लाने के लिए दस साल पहले कवायद शुरू की गई थी। इसके लिए देशभर के नेशनल पार्कों का सर्वे किया गया था ताकि दक्षिण अफ्रीका से लाए जाने वाले चीतों के लिए अनुकूल रहवास क्षेत्रों का चयन किया जा सके।

वाइल्ड लाइफ इंस्टीट्यूट आफ इंडिया (डब्ल्यूआइआइ) और वाइल्ड लाइफ ट्रस्ट आफ इंडिया (डब्ल्यूटीआइ) ने सर्वे किया था। सर्वे में गुरु घासीदास राष्ट्रीय उद्यान का चयन किया गया था, लेकिन दस वर्ष बीत जाने की वजह से केंद्र सरकार ने दोबारा सर्वे करने के लिए पत्र लिखा है।

केंद्र सरकार ने पत्र जारी कर वन विभाग से पूछा है कि दस साल पहले हुए सर्वे के बाद गुरु घासीदास नेशनल पार्क में किस तरह से बदलाव आया है। वहां चीता के रहने की क्या संभावनाएं हैं। चीता के रहवास एरिया को किस तरह से अपग्रेड किया जा सकता है।

वन विभाग इसके लिए लांग टर्म प्लान बनाए। अन्य कोई जगह उपयुक्त हो तो वह भी बताएं, जहां चीता आसानी से रह सकता है। साथ ही लिखा है कि वन विभाग के अधिकारी इसके लिए पूरी शक्ति से जुड़ें और जल्द से जल्द जानकारी दें।

आज 1948 के बाद चीता दिखाई नहीं दिया :

भारत में तीन अंतिम चीतों को 1948 में कोरिया के रामगढ़ गांव के जंगल से लगे इलाके में महाराजा रामानुज प्रताप सिंहदेव ने मार गिराया था। यह कोरिया जिले में एवं पूरे भारत में चीता दिखने की अंतिम घटना थी। नामीबिया से लाए जाने की चर्चा : वन विभाग के सूत्रों के अनुसार चीता के लिए उपयुक्त अभयारण्यों को लेकर दिल्ली में बैठक हुई थी। उसके बाद राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण से इन सभी का ब्योरा भी मांगा। योजना के तहत देश में कुल 20 चीता अफ्रीका के नामीबिया से लाए जाने की चर्चा है, हालांकि पहली खेप में सिर्फ दो या तीन लाए जा सकते हैं।

दस साल पहले चीता के रहवास के लिए देशभर में सर्वे हुआ था, जिसमें छत्तीसगढ़ के गुरु घासीदास नेशनल पार्क का भी चयन हुआ था। 10 साल बाद वर्तमान में क्या स्थिति है, इसको लेकर केंद्र सरकार से पत्र आया है। सर्वे कर रिपोर्ट मांगी गई है। – अरुण कुमार पांडेय, अतिरिक्त प्रधान मुख्य वन संरक्षक वाइल्ड लाइफ, रायपुर

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