भारत-भूटान सीमा पर कार्रवाई के दौरान विस्फोटक और अन्य सामग्री बरामद

एनडीएफबी उन उग्रवादी संगठनों में से एक है जिसने कई बड़े हमलों को अंजाम दिया

चिरांग:असम के चिरांग में भारत-भूटान सीमा पर कार्रवाई के दौरान 7.5 किलोग्राम विस्फोटक, दो देसी राइफलें, बारूद, लोहे और स्टील के छर्रे, बिजली के तार और कई अन्य चीज बरामद हुईं. इसका संबंध नवगठित उग्रवादी संगठन, नेशनल लिबरेशन फ्रंट ऑफ बोडोलैंड (एनडीएफबी) (NDFB) से होने का संदेह है. पुलिस ने शनिवार को यह जानकारी दी.

एनडीएफबी के कार्यकर्ताओं को विस्फोटक पदार्थों की आपूर्ति के संबंध में एक व्यक्ति को गिरफ्तार किया गया था. गिरफ्तार व्यक्ति की तरफ से प्रदान की गई जानकारी के आधार पर, पुलिस ने खुनग्रिंग, सेलेखगुरी और शांतिपारा में तलाशी अभियान शुरू किया.पुलिस ने कहा कि तलाशी के दौरान गुरुवार रात

कब हुआ था एनएलएफबी का गठन

एनडीएफबी उन उग्रवादी संगठनों में से एक है जिसने कई बड़े हमलों को अंजाम दिया है. इनके निशाने पर हमेशा से ही भारतीय जवान रहे हैं. इसका जाल भारत, बांग्लादेश, भूटान और म्यांमार में फैला हुआ है. इसको भारत सरकार की तरफ से संगठनों की सूची में काफी पहले ही डाल दिया गया था.

एनडीएफबी का गठन 1986 में हुआ था तब इसको बोडो सिक्‍योरिटी फोर्स के नाम से जाना जाता था. इसको मौजूदा नाम 1994 में दिया गया था. इसका हैडक्‍वार्टर म्‍यांमार में है. एनडीएफबी में दो गुट हैं, पहला आईके सांग्बिजित के नेतृत्व में एनडीएफबी(एस) तो दूसरा गुट एनडीएफबी(आर-बी) के नाम से जाना जाता है.

इसका नेतृत्‍व डायमरी करते हैं. पहले यह गुट जहां संघर्ष में विश्‍वास रखता है वहीं एनडीएफबी(एस) हमेशा से ही वार्ता का समर्थन करता आया है. पहले ये दोनों गुट एक ही थे, लेकिन साल 2012 के बाद से दोनों अलग हो गए.

ज्यादातर हमलों के लिए एनडीएफबी(आर-बी) ग्रुप ही जिम्मेदार है.इससे अलावा इसके युनाइटेड लिबरेशन फ्रंट ऑफ असम (उल्फा), कामतापुर लिबरेशन ऑर्गनाईजेशन(केएलए), नेशनल वालंटियर्स काउंसिल(एएनवीसी) से भी संबंध रहे हैं.

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