मेक इन इंडिया से कई गुना बढ़ा मोबाइल फोन का निर्यात

नई दिल्ली : प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र सरकार का बहुचर्चित मेक इन इंडिया कार्यक्रम मोबाइल निर्माण क्षेत्र में बेहद सकारात्मक नतीजे दे रहा है। वर्ष 2015 में शुरू किए गए इस कार्यक्रम के तहत अभी तक मोबाइल फोन या इससे जुड़े उपकरण बनाने वाली 120 कंपनियां भारत में फैक्ट्री लगा चुकी हैं। इस वजह से पिछले तीन वर्षो में मोबाइल फोन के आयात पर खर्च होने वाली विदेशी मुद्रा की राशि 350 करोड़ डॉलर (24,500 करोड़ रुपये) से घटकर महज 50 करोड़ डॉलर (3,500 करोड़ रुपये) रह गई है। यही नहीं, निर्यात होने वाले स्मार्टफोन की संख्या में सिर्फ एक वर्ष में लगभग आठ गुना बढ़ोतरी हुई है।

गुरुवार को भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआइ) की तरफ से जारी अप्रैल, 2019 की मासिक रिपोर्ट में भारत में आयात के मोर्चे पर हो रहे बदलाव पर एक विस्तृत आलेख है। इसमें इलेक्ट्रॉनिक्स आयात का उल्लेख है। हालांकि आलेख में इलेक्ट्रॉनिक्स उपकरणों के आयात की मात्रा पर काफी चिंता जताई गई है। लेकिन, इसमें मोबाइल फोन के बढ़ते निर्यात को एक उम्मीद की किरण के तौर पर पेश किया गया है।

आलेख के मुताबिक भारत के आयात का आकार अभी तक स्वर्ण और पेट्रोलियम उत्पादों से तय होता था। लेकिन हाल के वर्षो में इलेक्ट्रॉनिक्स उपकरणों का आयात बेहद महत्वपूर्ण हो गया है। वर्ष 1993-94 से वर्ष 2017-18 के बीच इलेक्ट्रॉनिक्स उपकरणों का आयात 15 फीसद सालाना बढ़ोतरी के साथ 90 करोड़ डॉलर मूल्य से बढ़कर 5,150 करोड़ डॉलर का हो गया है। इतनी बढ़ोतरी किसी भी दूसरे उत्पाद के आयात में नहीं हुई है। देश के कुल आयात में इलेक्ट्रॉनिक्स उपकरणों की हिस्सेदारी चार फीसद से बढ़ कर 11 फीसद हो गई है। बहरहाल, सरकार के मेक इन इंडिया कार्यक्रम से हालात में बदलाव आने की उम्मीद है। वैसे इसके संकेत मोबाइल फोन के निर्यात पर दिखाई भी देने लगा है।

रिपोर्ट के मुताबिक अप्रैल-दिसंबर, 2017 के दौरान मोबाइल फोन का निर्यात 10.42 करोड़ डॉलर का था जो अगले वर्ष की समान अवधि में 95.57 करोड़ डॉलर का हो गया। रूस, दक्षिण अफ्रीका, यूएई और चीन को मोबाइल फोन निर्यात होने लगा है।

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