नकली रेमडेसिविर इंजेक्शन के मल्टी स्टेट स्कैम के तार रायपुर से जुड़े होने का खुलासा

रायपुर के कारोबारी ने पुलिस को पत्र लिखकर दी इसकी जानकारी

रायपुर:कोरोना पेशेंट्स के इलाज में कारगर रेमडेसिविर इंजेक्शन के नाम पर नकली माल सप्लाई मामले में बड़ा खुलासा हुआ है। राजधानी रायपुर के कारोबारी ने पुलिस को पत्र लिखकर बताया कि मध्य प्रदेश के जबलपुर में मिले नकली रेमडेसिविर इंजेक्शन के मल्टी स्टेट स्कैम के तार रायपुर से भी जुड़े होने का खुलासा हुआ है।

पत्र में बताया गया है कि उन्होंने भी सूरत के कारोबारी को रेमडेसिविर इंजेक्शन की सप्लाई के लिए एडवांस दिया था। रायपुर के डायमंड एजेंसी ने दावा किया है रेमडेसिविर इंजेक्शन की सप्लाई के लिए लगभग 6.80 लाख रूपये एडवांस दिया था। इंजेक्शन की सप्लाई नहीं होने और नकली होने के खुलासा के बाद पुलिस से शिकायत की गई है।

डायमंड एजेंसी की ओर से मामले में दर्ज एफआईआर में कहा है कि दो किश्तों में 4 और 2.72 लाख रुपए लेने के बाद से सूरत के इस दवा सप्लायर ने फोन उठाना बंद कर दिया है। पुलिस ने शिकायत के आधार पर जांच शुरू कर दी है। ड्रग कंट्रोलर विभाग ने भी नकली इंजेक्शन की पड़ताल कर रहा है।

पड़ोसी राज्य मध्य प्रदेश में नकली रेमडेसिविर इंजेक्शन खपाने के खुलासे के बाद इसके तार छत्तीसगढ़ से भी जुड़े होने और नकली इंजेक्शन रायपुर सहित राज्य के दूसरे शहरों में खपाए जाने की आशंका जताई थी जो सच साबित हुई है। राजधानी रायपुर की एक दवा फर्म ने भी उसी फर्म को रेमडेसिविर इंजेक्शन का ऑर्डर दिया था, जिसने देश भर में 1 लाख से ज्यादा नकली रेमडेसिविर इंजेक्शन खपाए हैं।

रायपुर की डायमंड एजेंसी ने पहली खेप में 200 रेमडेसिविर इंजेक्शन का ऑर्डर मुख्य आरोपी कौशल वोरा की फर्म आदिनाथ डिस्पोजल को दिया था। डायमंड एजेंसी ने बतौर एडवांस आदिनाथ डिस्पोज़ेबल के खाते में 6,80,400 रुपये ट्रांसफर किया था। लेकिन इंजेक्शन सप्लाई से पहले ही रैकेट का भंडाफोड़ हो गया और गुजरात पुलिस ने आरोपियों को धर दबोचा।

इधर नकली रेमडेसिविर खपाने के मामले में मध्यप्रदेश पुलिस ने भी ताबड़तोड़ कार्रवाई करते हुए इंदौर-जबलपुर सहित कई शहरों में नकली इंजेक्शन खपाये जाने का खुलासा करते हुए बड़ी संख्या में आरोपियों का पकड़ा है। पकड़े गए आरोपी में जबलपुर सिटी हास्पिटल का संचालक भी शामिल है जिसने लगभग 500 से ज्यादा नकली इंजेक्शन अपने अस्पताल के माध्यम से खपाये थे। जबलपुर के इस आरोपी का राजधानी रायपुर से भी पारिवारिक व कारोबारी संबंध है।

गौरतलब है कि गुजरात के सूरत से नकली रेमडेसिविर लाने और उसे खपाने के मामले में सिटी अस्पताल के संचालक सरबजीत सिंह मोखा को मुख्य आरोपी बनाया गया है। सरबजीत सिंह मोखा के तार गुजरात के मोरबी में बनी नकली रेमडेसिविर इंजेक्शन से जुड़े हैं। जबलपुर से गिरफ्तार दवा व्यवसायी ने सरबजीत सिंह मोखा का नाम लिया था। पुलिस जांच में मोखा के खिलाफ सबूत मिले हैं। जिसके बाद सरबजीत सिंह मोखा पर पुलिस ने मामला दर्ज किया है।

पुलिस ने मोखा का आपराधिक रिकॉर्ड खंगाला तो पता चला कि मोखा डकैती की वारदात को भी अंजाम दे चुका है। वर्ष 2004 में हथियारों से लैस मोखा और उसके साथियों ने नेपियर टाउन में डकैती की थी। इस मामले में गोरखपुर पुलिस ने मोखा और उसके साथियों पर भारतीय दंड विधान की धारा 395, 397, 120 बी समेत आम्र्स एक्ट की धारा 25 व 27 के तहत प्रकरण दर्ज किया था।

पुलिस ने रेमडेसिविर कालाबाजारी के मामले को हल्के में लिया

राजधानी की पुलिस ने रेमडेसिविर कालाबाजारी के मामले को बड़े ही हल्के में लिया और आरोपियों को 151 जैसी मामूली धारा लगाकर जमानत पर छुटने दिया। जबकि अगर पकड़े गए आरोपियों को रिमांड पर लेकर कड़ी पूछताछ की जाती तो बड़े चेहरे बेनकाब हो सकते थे। लेकिन न ही सरकार ने और नही पुलिस ने कालाबाजारी को मामलों को गंभीरता से लिया।

कालाबाजारी में दवा कारोबार से जुड़े लोग और अस्पतालों की भूमिका संदिग्ध रही है, इसकी पड़ताल की जानी चाहिए थी। इससे राजधानी और अन्य शहरों में इस्तेमाल किए गए रेमडेसिविर इंजेक्शन की कालाबाजारी कहां से हो रही है और इंजेक्शन नकली है या असली इसका सच सामने आ सकता था। लेकिन पुलिस बड़े अस्पताल प्रबंधनों और राजनीतिक संरक्षण वाले जिम्मेदारों पर हाथ डालने से बचने के लिए कालाबाजारी के मामलों में खानापूर्ति करती रही।

डायमंड एजेंसी से हो पूछताछ

गुजरात की आदिनाथ डिस्पोजल को रेमडेसिविर इंजेक्शन का आर्डर देने वाली डायमंड एजेंसी से भी पुलिस को कड़ी पूछताछ करनी चाहिए कि आखिर उसे इस कंपनी के बारे में कहां से जानकारी मिली। किसके माध्यम से खरीदी तय हुई। यह भी पता करना चाहिए कि डायमंड एजेंसी के अलावा क्या किसी और भी स्थानीय एजेंसी ने उक्त कंपनी से इंजेक्शन खरीदी है, अगर खरीदी है तो क्या उसकी डिलिवरी मिली और यदि डिलिवरी मिली तो इंजेक्शन कहां खपाए गए इसकी भी पड़ताल की जानी चाहिए। जाहिर जब शहर के एक एजेंसी ने उक्त कंपनी को इंजेक्शन के आर्डर दिए तो कई और एजेंसियां भी होंगी जिसे उक्त एजेंसी के बारे जानकारी रही हो और उसने भी इंजेक्शन के लिए आर्डर दिए हों. पुलिस को अब रेमडेसिविर की कालाबाजारी और नकली इंजेक्शन दोनों मामलों में बारीकी से जांच करने की जरूरत है ताकि आपदा को अवसर बनाकर लोगों को लूटने वाले बेनकाब हो सकें।

भिलाई में 6 नग रेमडेसिविर के साथ युवक गिरफ्तार

भिलाई पुलिस ने इंजेक्शन की सौदेबाजी करने वाले एक आरोपी को दबोचा है। आरोपी के कब्जे से 6 नग रेमडेसिवर समेत 6 नग ऑक्सीजन मास्क जब्त किया है। जानकारी के अनुसार सलमान अली को पुलिस ने रेमडेसिविर इंजेक्शन की कालाबाजारी करते हुए दबोचा है।

ड्रग एंड सेफ्टी विभाग की टीम ने छावनी पुलिस की मदद से आरोपी को शहर के बसंत टॉकीज के पास रेमडेसिवर इंजेक्शन के साथ गिरफ्तार किया। इस दौरान पुलिस ने सलमान के कब्जे से 6 नग रेमडेसिवर समेत 6 नग ऑक्सीजन मास्क जब्त किया है।

छग में 35-40 हजार रुपए में लोगों ने खरीदे रेमडेसिविर

छत्तीसगढ़ में भी रेमडेसिविर के कालाबाजारी की बड़ी संख्या में आए मामले और कोरोना से संक्रमित मरोजों के परिजनों द्वारा 35-40 हजार में इंजेक्शन खरीदने की खबरों से साफ है कि छत्तीसगढ़ में भी रेमडेसिविर का कृत्रिम अभाव पैदाकर इंजेक्शन की कालाबाजारी की गई और मरोजों को दस गुना ज्यादा रेट पर इंजेक्शन खरीदने के लिए मजबूर किया गया।

इस मामले में अस्पतालों के साथ दवा कारोबारियों और मेडिकल फिल्ड से जुड़े लोगों के अलावा कुछ ऐसे लोग जो लोगों को सुविधा पहुंचाने के नाम पर मुनाफा कमाने का धंधा चलाने वालों की भूमिका संदिग्ध है। जिसकी पड़ताल करने की जरूरत है।

पुलिस ने कालाबाजारी के मामले में पकड़े गए आरोपियों से सख्ती से पूछताछ करती तो कई चौंकाने वाले तथ्य सामने आ सकते थे लेकिन पुलिस ने मामूली धाराओं में कार्रवाई कर महज खानापूर्ति की वहीं ड्रग विभाग ने इन मामलों में कोर्ट में केस लगाकर जिम्मेदारी की इतिश्री कर ली, जबकि पकड़े गए आरोपियों से कड़ी पूछताछ कर उनके पीछे सक्रिय लोगों को बेनकाब किया जाना था। इस पूरे मामले में अस्पतालों की भूमिका की सख्ती से जांच की जानी चाहिए।

ड्रग विभाग ने शुरु की जांच

सहायक औषधी नियंत्रक कमलकांत पाटनवार के अनुसार ड्रग विभाग ने जांच शुरु कर दी है। अप्रैल में जब सरकारी स्तर पर रेमडेसिविर इंजेक्शन की उपलब्धता कराई जा रही थी, उस समय यहां की एजेंसी ने क्यों सूरत की एजेंसी को ऑर्डर दिया। इसकी जांच की जा रही है।

मध्यप्रदेश पुलिस ने जांच में दिखाई तत्परता

मप्र पुलिस ने फूर्ति से तत्परता दिखाते हुए बिना किसी दबाव और परवाह किए कि प्रदेश में भाजपा की सरकार एवं आरोपी आरएसएस का बड़ा नेता है अपनी कानूनी कार्रवाई को कड़े से कड़े जांच के दायरे में लाकर नकली रेमडेसिविर इंजेक्शन के मुख्य आरोपी साबित होने के उपरांत तत्काल कानूनी कार्रवाई करने में देर नहीं की। अपराध दर्ज कर अपराधी को न सिर्फ गिरफ्तार किया अपितु रासुका लगाकार उसकी सारी संपत्ति को बुलडोजर से जमींदोज कर दिया।

छत्तीसगढ़ में कालाबाजारी के माध्यम से जितने भी मरीजों को रेमडेसिविर इंजेक्शन लगे है उनमें से अधिकतर मरीज मौत की आगोश में समा गए है । यह जनता के रिश्ता के अध्ययन में सामने आया है। जब से सरकार ने अपने हाथों से रेमडेसिविर का लिस्ट लेकर अस्पतालों को वितरण की व्यवस्था लागू की तब से अभी तक रेमडेसिविर लगने के बाद मरने वाले मरीजों की संख्या में काफी कमी आई है।

छग पुलिस के लिए जांच का विषय

राजधानी पुलिस को पूर्व में पकड़े गए और जब्त हुए रेमडोसिविर की तत्काल जांच करनी चाहिए, अगर नकली निकले तो पूर्व में पकड़े गए खूनी आरोपियों को कमजोर और मामूली धाराओं में जमानत दे दी उसे रद्द कर तत्काल सभी आरोपियों को फिर से गिरफ्तार कर रासुका लगाकर मप्र पुलिस की तरह कार्रवाई करनी चाहिए।

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