राष्ट्रीय

गिर अभयारण्य : नहीं थम रहा सिलसिला, अब तक 23 शेरों की मौत

इन शेरों की मौत एक जानलेवा वायरस की वजह से हुई है

गुजरात :

गुजरात के गिर में शेरों की मौत का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है। गिर अभयारण्य में जांच अभियान के दौरान बचाव केंद्र में भेजे गए दो और शेरों की मंगलवार को मौत हो गई। अब तक कुल 23 शेरों ने जान गंवाई ।

बताया जा रहा है कि इन शेरों की मौत एक जानलेवा वायरस की वजह से हुई है। यह वायरस कुत्तों से जंगली जानवरों में फैला है। इसी वायरस की वजह से साल 1994 में तंजानिया के सेरेंगेटी रिजर्व में करीब 1000 शेरों की मौत हो गई थी।

गुजरात वन विभाग के मुताबिक, 12 से 19 सितंबर के बीच गिर वन के दलखनिया रेंज में 11 शेर अपने शावकों समेत मृत पाए गए थे। इनमें से चार शेर कैनाइन डिस्टेंपर वायरस (सीडीवी) से संक्रमित थे।

बता दें कि पूरे विश्व में शेर की दो प्रमुख प्रजातियां हैं। इनमें पहला एशियाटिक शेर और दूसरा अफ्रीक्री शेर हैं। भारत में एशियाटिक शेर ही पाए जाते हैं और इनकी सबसे ज्यादा संख्या गिर वन में ही है। इन्हें भारत का गर्व कहा जाता है, लेकिन पिछले कुछ दिनों से हो रही शेरों की मौतों से भारत का गर्व खतरे में आ गया है।

वन विभाग ने एहतियात के तौर पर सेमरडी इलाके के पास सरसिया से 31 शेरों को हटाकर जामवाला रेस्क्यू सेंटर में शिफ्ट कर दिया है, ताकि इन्हें वायरस से बचाया जा सके।

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