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फर्जी मुठभेड़ मामले में होगा एकतरफा निर्णय – CIC

केंद्रीय सूचना आयोग ने गृह मंत्रालय को चेतावनी दी कि असम में फर्जी मुठभेड़ का आरोप लगाने वाली सीआरपीएफ महानिरीक्षक की रिपोर्ट के संबंध में सूचनाओं के खुलासे की मांग पर यदि उसका अधिकारी अगली सुनवाई के दिन मौजूद नहीं रहता है तो वह एकतरफा निर्णय होगा। सूचना आयुक्त यशोवर्धन आजाद ने अपने आदेश में कहा कि जो तीन जानकारियां मांगी गयी हैं, उनका संबंध केंद्रीय गृह मंत्रालय से हैं। वे हैं: सीआरपीएफ महानिरीक्षक रजनीश राय की रिपोर्ट पर की गयी कार्रवाई, इस रिपोर्ट की प्रतिलिपि और क्या राय के विरुद्ध जांच चल रही है।

गुजरात संवर्ग के 1992 बैच के आईपीएस अधिकारी रजनीश राय ने पिछले साल सीआरपीएफ के शीर्ष अधिकारियों को एक रिपोर्ट दी थी और बताया था कि कैसे सेना, अर्धसैनिक बल और असम पुलिस ने 29-30 मार्च 2017 को चिरांग जिले के सिमालगुड़ी इलाके में फर्जी मुठभेड़ की थी और दो व्यक्तियों को एनडीएफबी (एस) के सदस्य बताकर उन्हें मार दिया था। सीआरपीएफ ने एक पत्रकार को इस रिपोर्ट और उससे जुड़े मुद्दों के बारे में कोई भी जानकारी देने से यह कहते हुए इनकार कर दिया था कि इसे पारदर्शी कानून से छूट प्राप्त है।

केंद्रीय सूचना आयोग ने सीआरपीएफ को सूचना देने का निर्देश दिया है। सूचना आयुक्त ने कहा कि अपीलकर्ता ने प्रथम दृष्टया सूचना के प्रकट करने का मामला स्थापित करने में कामयाब रहा है क्योंकि फर्जी मुठभेड़ मानवाधिकार का उल्लंघन है और यह सीआरपीएफ को प्राप्त छूट के अंतर्गत नहीं आता। आजाद ने कहा कि राय ने रिपोर्ट भेजी या नहीं और कब यह रिपोर्ट मिली, इन दो सूचनाओं का सीआरपीएफ को खुलासा करना चाहिए क्योंकि यह उसे प्राप्त छूट या आरटीआई के छूट उपबंध के अंतर्गत नहीं आता है। गृह मंत्रालय के सीपीआईओ को आयोग के समक्ष अपना पक्ष रखने को कहा गया है और उनसे पूछा गया कि कैसे यहां सूचना रोकने के लिए राष्ट्रीय सुरक्षा उपबंध लगेगा। लेकिन वह 23 मार्च 2018और 28 मई, 2018 को पेश नहीं हुए।

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