पीएम केयर फंड में 50 लाख रुपये देने का झूठा झांसा, एफआईआर दर्ज कर की जाएगी कार्रवाई

बड़े मीडिया संस्थानों को धोखे में रखकर छपवा दिए बड़े-बड़े विज्ञापन

फर्रुखाबाद: उत्तर प्रदेश के फर्रुखाबाद में एक आदमी ने पीएम केयर फंड में 50 लाख रुपये देने की घोषणा कर दी. इसके ऊपर पहले से ही 420 के केस चल रहां हैं. इतनी बड़ी रकम जिसने सुनी उसके कान खड़े हो गए.

50 लाख रुपये देने की घोषणा

इस शख्स पर आरोप है कि उसने मीडिया संस्थानों को गुमराह करके विज्ञापन भी छपवा दिए ताकि वो अपनी राजनीति भी चमका सके और इतनी बड़ी रकम दान देने के नाम पर लोगों से धनउगाही भी कर सके. ये फ्रॉड फर्रुखाबाद के कमालगंज से जुड़ा है. यहां का रहने वाला सुनील कुमार उर्फ सुनील दत्त ने 50 लाख रुपये केयर फंड में देने के घोषणा कर दी.

बाकयदा एक आयोजन करके मीडिया को निमंत्रण दिया और 50 लाख रुपये देने की ये घोषणा कर दी. बड़े मीडिया संस्थानों को धोखे में रखकर बड़े-बड़े विज्ञापन भी छपवा दिए. मीडिया को बाकयदा एक चेक भी दिखाया. लेकिन शख्स ने ये चेक प्रशासन को सौंपने के बजाय अपनी जेब में ही डाल लिया.

अब इस शख्स पर आरोप लग रहे हैं कि वो प्राइम मिनिस्टर केयर फंड में 50 लाख रुपये देने का झूठ बोलकर ना केवल अपनी राजनीति चमका रहा है बल्कि 50 लाख रुपये देने का झूठा झांसा देकर पूरे कस्बे में धनउगाही कर रहा है.

सुनील कुमार के खाते में कुल 50 हजार रुपये भी नहीं

आपको जान कर ताज्जुब होगा कि सुनील कुमार के खाते में 50 लाख रुपये तो छोड़ दीजिए कुल 50 हजार रुपये भी नहीं हैं. 50 लाख रुपये का दान देने की झूठी बात कहकर अपनी वाहवाही लूटने वाले पर अब शिकंजा कसता जा रहा है.

फर्रुखाबाद के डीएम मानवेंद्र सिंह ने पत्र लिखकर सुनील दत्त से 3 दिन में उसकी बैंक खाते की जानकारी उपलब्ध कराने के लिए कहा है. डीएम मानवेंद्र सिंह ने बताया कि सुनील से उसकी बैंक डिटेल मांगी गई है और अगर 3 दिन में वो अपनी बैंक डिटेल नहीं देते हैं तो उसके खिलाफ एफआईआर दर्ज करके कार्रवाई की जाएगी. हालांकि इस सुनील दत्त का कहना है कि उसने प्रधानमंत्री राहत कोष में 5000000 का चेक से दान दिया है.

इस मामले पर एलडीएएम डी एन पाल का कहना है कि इस पूरे काम में इसकी मदद कर रहे हैं कुछ कथित पत्रकार, जो मामूली लालच में ना केवल पत्रकारिता के पेशे पर धब्बा लगा रहे हैं, बल्कि समाज के साथ भी धोखा कर रहे हैं. इन्हीं कथित पत्रकारों की मदद से शहर के बड़े अखबारों को गुमराह कर विज्ञापन भी छपवाए गए थे. वहीं अभी तक इस कथित सबसे बड़े फ्रॉड दानवीर के बारे में प्रशासन को भी अभी तक कोई जानकारी ही नहीं है.

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