कंपनी के ग्रुप हेल्थ इंश्योरेंस पॉलिसी में जोड़ सकते हैं परिवार, जानें कैसे..

नई दिल्ली। कंपनियां अपने खर्च पर ग्रुप हेल्थ इंश्योरेंस पॉलिसी के जरिये कर्मचारियों को स्वास्थ्य और जीवन बीमा का सुरक्षा कवर देती हैं। हालांकि बीमा का यह कवर ज्यादातर कर्मचारियों के लिए एक-दो लाख रुपये का ही होता है, जो पर्याप्त नहीं होता है। ऐसे में लोग अलग से टर्म प्लान या जीवन बीमा पॉलिसी खरीदते हैं, लेकिन अगर कर्मचारी चाहें तो अतिरिक्त प्रीमियम देकर बीमा का दायरा बढ़ा सकते हैं।

विशेषज्ञों का कहना है कि परिवार के मुखिया के लिए अलग-अलग बीमा योजनाएं लेने से बेहतर है कि कम खर्च में किसी ग्रुप हेल्थ इंश्योरेंस पॉलिसी के दायरे में पूरे परिवार को लाया जाए। किसी बदलाव के लिए आपको नियोक्ता कंपनी से संपर्क करना पड़ेगा। हालांकि हर कंपनी की ग्रुप पॉलिसी को लेकर शर्तें अलग-अलग हो सकती हैं।

मां-बाप को भी सुरक्षा कवच दें : मान लीजिए कि आपके पास दो लाख रुपये कंपनी का ग्रुप मेडिकल इंश्योरेंस है तो इसे फैमिली फ्लोटर प्लान में बदलकर पत्नी और बच्चों को शामिल करा सकते हैं।

वहीं फैमिली फ्लोटर प्लान कंपनी ने दिया है तो इसमें 14-15 हजार रुपये का अतिरिक्त प्रीमियम देकर माता-पिता को भी शामिल कराया जा सकता है। अगर दो लाख रुपये आपके लिए नाकाफी है तो आप 14-15 हजार के अतिरिक्त प्रीमियम पर इसे दस लाख रुपये किया जा सकता है। यह प्रीमियम आपके वेतन से कट जाएगा।

स्वास्थ्य बीमा पर धारा 80डी के तहत कर छूट का लाभ मिलता है। परिवार के किसी सदस्य के लिए भी मेडिकल प्रीमियम का भुगतान करते हैं तो उस पर भी कर छूट का दावा किया जा सकता है। आप अपने, पत्नी-बच्चों के लिए प्रीमियम पर 25 हजार रुपये तक छूट पा सकते हैं, वहीं माता-पिता को मिलाकर 25 हजार और छूट पाई जा सकती है। अगर मां-बाप वरिष्ठ नागरिक हैं तो उनके प्रीमियम पर 50 हजार रुपये तक की छूट मिलेगी। खुद भी वरिष्ठ नागरिक हैं तो एक लाख रुपये तक टैक्स बचत हो सकती है।

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