ज्योतिष

पितृ दोष के प्रसिद्ध शांति स्थल

आचार्या रेखा कल्पदेव:

भारतवर्ष में पितृ दोष शांति के लिए कई तीर्थों को मुख्य माना गया है। शास्त्रों के अनुसार किया गया पिंडदान और श्राद्ध कर्म सबसे ज्यादा मान्य है। इन स्थानों पर श्राद्ध करने से पितरों की आत्मा को शांति मिलती है जिनकी जानकरी नीचे दी गई है।

1. देव प्रयाग, (उत्तराखंड):

यह भागीरथी एवं अलकनन्दा का संगम है। यहां पितरों के निमित्त श्राद्ध तर्पण आदि किया जाता है।

2. त्रियुगीनारायण या सरस्वती कुंड, (उत्तराखंड):

रूद्र प्रयाग के समीप इस तीर्थ पर भगवान नारायण, भू-देवी एवं लक्ष्मी देवी विराजमान हैं। यहां सरस्वती नदी पर स्थित रूद्र कुंड स्नान, विष्णु कुंड मार्जन, ब्रह्मकुंड आश्वन और सरस्वती कुंड तर्पण के लिए हैं।

3. रामेश्वरम (तमिलनाडु):

यहां पर पिंडदान करने से पितृगण पूर्ण रूप से संतुष्ट होते हैं।

4. रूद्रनाथ, केदारनाथ, (उŸाराखंड):

यह तीर्थ पंच केदार में से एक तुंगनाथ के समीप स्थित है।

5. बद्रीनाथ, ब्रह्म कपाल शिला, (उत्तराखंड):

अलकनन्दा नदी के किनारे ब्रह्म कपाल (कपाल मोचन) तीर्थ है। यहां पिंडदान किया जाता है।

6. हरिद्वार, हरकी पौड़ी, (उत्तराखंड):

यहां सप्त गंगा, त्रि-गंगा और शक्रावर्त में विधिपूर्वक देव ऋषि एवं पितृ तर्पण करने वाला पुण्यलोक में प्रतिष्ठित होता है। तदनन्तर कनखल में पवित्र स्नान किया जाता है।

7. कुरूक्षेत्र, पेहेवा, (हरियाणा):

हरियाणा के अम्बाला जिले में सरस्वती नदी के दाहिने तट पर स्थित इस तीर्थ को अधिक पुण्यमय माना जाता है।

8. पिंडास्क, जींद, (हरियाणा): इसे पिंड तारक तीर्थ भी कहते हैं। यहां स्नान करके पितृ तर्पण किया जाता है।

9. उज्जैन (मध्यप्रदेश):

यहां बहती क्षिप्रा नदी भगवान विष्णु के शरीर से उत्पन्न मानी जाती है, जिस पर कई घाट पर मंदिर बने हैं, महाकाल के इस स्थान पर श्राद्ध करने से पितृ पूर्ण तृप्त होते हैं।

10. नासिक (महाराष्ट्र):

यहां बहने वाली गोदावरी नदी भारत की प्रसिद्ध सात नदियों में से एक है। यहां पितरों की संतुष्टि हेतु स्नान तर्पण आदि कर्म किये जाते हैं।

11. त्र्यंम्बकेश्वर (महाराष्ट्र):

यहां महर्षि गौतम ने तपस्या कर शिव जी को प्रसन्न किया था। पितृ दोष शान्ति का यह प्रमुख स्थान है।

12. प्रयागराज, इलाहाबाद, (उत्तर प्रदेश):

यहां श्राद्ध एवं पितृ तर्पण करने से बहुत अधिक पुण्य की प्राप्ति होती है।

13 काशी, मणिकर्णिका घाट, (उत्तर प्रदेश):

यह पुरी भगवान शंकर के त्रिशूल पर बसी हुई है और प्रलय में भी इसका नाश नहीं होता है। यहां श्राद्ध एवं पितृ तर्पण करने से पितृ तृप्त होकर सभी सुख प्रदान करते हैं।

14. अयोध्या :

सप्त पुरियों में अयोध्या को प्रथम पुरी माना गया है। यहां सरयू नदी पर पितृ तर्पण एवं श्राद्ध करने से पितृ तृप्त होकर आशीर्वाद देते हैं।

15. गया (बिहार):

यह भारत का प्रमुख पितृ तीर्थ है। पुराणों के अनुसार पितृ कामना करते हैं कि उनके वंश में कोई ऐसा पुत्र हो जो गया जाकर उनका श्राद्ध करे। गया में पिंडदान से पितरों को अक्षय तृप्ति प्रदान होती है।

16. बोधगया (बिहार):

यहां भगवान बुद्ध का विशाल मंदिर है। यहां पितृ तर्पण एवं श्राद्धकर्म का विशेष महत्व है।

17. राजगृह (बिहार):

यह हिन्दू, बौद्ध एवं जैन तीनों धर्मों का तीर्थ स्थल है। यहां पुरूषोत्तम मास में श्राद्ध करने से पितृ तृप्त होते हैं। इनके अतिरिक्त अन्य भी कई स्थल हैं जहां पितृ दोष की शांति कराई जाती है।

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