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किसान आंदोलन का पोल्ट्री फार्म पर असर, आधे रेट पर बिक रही हैं मुर्गियां

7 दिसम्बर को बाज़ार में अंडा 420 रुपये प्रति सैकड़ा तक बिका

नई दिल्ली: पोल्ट्री फार्म हाउस के मालिक और यूपी पोल्ट्री फार्म एसोसिएशन के अध्यक्ष नवाब अली ने कहा कि पोल्ट्री फार्म मालिक भी किसान हैं. हम अंडा (Egg) उत्पादन करते हैं. लेकिन हमे कोई सुविधा नहीं दी जाती है. हमारे अंडे का तो एमएसपी (MSP) भी निर्धारित नहीं है.

हमारे पोल्ट्री के लिए बिजली भी कॉमर्शियल रेट पर मिलती है. फिर भी हम इस किसान आंदोलन में किसानों के साथ हैं. तो क्या हुआ जो हम कुछ दिन तक बाज़ार में अंडा नहीं बेचेंगे. साथ ही एक आम आदमी की हैसियत से भी हम इस बिल के खिलाफ हैं.

अध्यक्ष नवाब अली ने बताया कि किसान आंदोलन के चलते पोल्ट्री फार्म वाले भी थोड़ा संभलकर माल यहां-वहां भेज रहे हैं. ग्राहक भी कम ही आ रहा है. ग्राहक को भी पता है कि पोल्ट्री वाले खुद भी किसान हैं और आंदोलन में किसानों का समर्थन कर रहे हैं. इसलिए माल की उतनी सप्लाई नहीं हो पा रही है जितनी पहले जा रही थी. यही वजह है कि जो मुर्गी आंदोलन से पहले तक 80 रुपये किलो जा रही थी, वही अब 40 रुपये किलो पर आ गई है.

लेकिन हमे इसकी परवाह नहीं है. हम अपनी आने वाली पीढ़ी की जिंदगी को देख रहे हैं. किसानों के भविष्य के बारे में सोच रहे हैं. सस्ती तो छोड़िए, अगर हमें मुर्गियां और अंडे घर में भी रखने पड़े तो भी हम आंदोलन से पीछे नहीं हटेंगे. आंदोलन के चलते लगातार कम हो रहे हैं अंडों के दाम-किसान आंदोलन के चलते अंडों के दाम भी कम होना शुरु हो गए हैं.

मान्या ट्रेडर्स के राजेश राजपूत बताते हैं कि आंदोलन के 6-7 दिन तक तो सब कुछ ठीक-ठाक चला. 2 दिसम्बर को थोक में 100 अंडों के दाम 463 रुपये थे. यह वो वक्त था जब हर रोज़ अंडे पर 5 से 8 रुपये तक कम-ज़्यादा हो रहे थे. लेकिन 2 तारीख के बाद से तो अंडे के दाम जो गिरना शुरु हुए तो अभी तक गिर ही रहे हैं. 7 दिसम्बर को बाज़ार में अंडा 420 रुपये प्रति सैकड़ा तक बिका. जबकि 6 दिसम्बर को यह रेट 423 रुपये थे.

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