महाराष्ट्र में फिर हिंसक हुए किसान, गाडियों में की आगजनी

हाल के दिनों में महाराष्ट्र में किसान आंदोलन के बाद सरकार ने किसानों को तत्काल 10,000 रुपये की मदद देने का ऐलान किया, लेकिन मुख्यमंत्री का यह ऐलान तुरंत अधर में जाता दिखा जब को-ऑपरेटिव बैंकों ने कैश की किल्लत के चलते किसानों को दलील दी.महाराष्ट्र में किसानों का प्रदर्शन उग्र हो गया है. मुंबई से 80 किलोमीटर दूर बदलापुर-कल्याण हाइवे पर किसानों ने प्रदर्शन किया और कई गाड़ियों में आग लगा दी.

बैंकों के पास करोड़ों रुपये पड़े हैं, लेकिन पुराने नोटों की शक्ल में. महाराष्ट्र के ज़िला को-ऑपरेटिव बैंकों में 2,770 करोड़ रुपये के पुराने नोट हैं, जिसे बदलने से आरबीआई ने इनकार कर दिया था. ज़्यादातर को-ऑपरेटिव बैंकों के नेताओं के होने की वजह से आरबीआई को ब्लैक मनी का शक है, क्योंकि बैंकों में पड़े पुराने नोटों में अधिकतर नोटबंदी के कुछ ही दिन बाद जमा कराए गए थे. सुप्रीम कोर्ट ने नाबार्ड को तहक़ीक़ात कर आरबीआई को ये बताने को कहा था कि को-ऑपरेटिव बैंकों में जमा पैसों में कितना किसानों का है. नाबार्ड ने दो महीने पहले ही आरबीआई को रिपोर्ट सौंप दी है, लेकिन आरबीआई की तरफ़ से अभी कोई बयान नहीं आया है. एनडीटीवी ने महाराष्ट्र के कई को-ऑपरेटिव बैंकों में जाकर पड़ताल की, लेकिन हर जगह से कैश की क़िल्लत की बात सुनने को मिली. इस बीच सवाल ये है कि 10,000 रुपये की मदद से किसानों को कितनी राहत मिलेगी.

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