सेब की खेती से किसान बन रहे आत्मनिर्भर

पौधे को सड़ने से बचाने के लिए बागवान ने निकाली तरकीब

दिल्ली: सरकार की नीतियों और उन्नत किसानों की वजह से आज कृषि क्षेत्र आत्मनिर्भरता की ओर कदम बढ़ा रहा है। बागवानी फसलों के क्षेत्र में भी देश आगे बढ़ रहा है। खासतौर से देश के प्रगतिशील किसान आज नए-नए प्रयोग के जरिए उत्पादन बढ़ाने में लगे हुए हैं। हिमाचल प्रदेश के एक बागवान ने भी एक ऐसी तरकीब निकाली है, जो सेब की खेती करने वाले बागवानों के लिए वरदान साबित हो रही है।

दरअसल हिमाचल प्रदेश की आर्थिकी में सेब का महत्वपूर्ण योगदान है। प्रदेश के ऊपरी क्षेत्रों के सेब बागवान सेब की फसल से अच्छी कमाई करते हैं, लेकिन सेब के पौधे में निश्चित अवधि पूरी होने के बाद जड़ व तना सड़ने से उन्हें काफी नुकसान उठाना पड़ता है। अभी तक बागवान इस समस्या का समाधान नहीं निकाल पाए थे, लेकिन अब इस समस्या का भी हल निकाल लिया गया है।

इस तरकीब से बढ़ा सेब का उत्पादन

शिमला जिले के कुमारसैन निवासी प्रगतिशील बागवान सुरेंद्र जरेट इसका समाधान निकाल कर लोगों के लिए प्रेरणादायी बने हैं। उन्होंने बताया कि पौधों के सड़ कर सूख रहे तनों को खुरच कर, उन्हें साफ करते हैं और उसके बाद सड़े हुए खोखले स्थान पर सीमेंट, रेत और बजरी मिलाकर कंक्रीट व प्लास्टर करते हैं।
सुरेंद्र बताते हैं कि सेब का बगान जब खरीदा था, तो पेड़ के तने सड़े हुए थे। अब इन सब में सीमेंट भर दिए। उन्होंने कहा कि इस विकल्प से पौधों में परिवर्तन आया और पौधे स्वस्थ होने लगे। अब काफी सुधार हुआ है। आज इन्हीं पेड़ों से 10-12 पेटी सेब पाते हैं।

अन्य बागवान भी अपना रहे तरकीब

वहीं अब कई अन्य बागवानों ने भी सुरेंद्र के बगीचे का दौरा कर उनके द्वारा प्रयोग किए गए तरीकों को अपनाया है और सफलता भी प्राप्त हुई है। ऐसे लोग जिनके बाग पुराने हो गए हैं या तने सड़ गए हैं, ऐसे पौधे को काटने के बजाय इस तरीके को अपना कर एक बार फिर लाभ कमा सकते हैं।
जाहिर है कृषि और बागवानी के क्षेत्र में लोगों द्वारा किए जा रहे नए-नए प्रयोग निश्चित तौर पर बागवानों के लिए प्रेरणा बन रहे हैं और उन्हें इस क्षेत्र में कार्य करने के लिए प्रेरित कर रहे हैं।

देश में सेब फसल का करीब 38 फीसदी उत्पादन

मौजूदा समय में हिमाचल में फल उत्पादन के तहत कुल 2.26 लाख हेक्टेयर क्षेत्र है और इसमें से 1.10 लाख हेक्टेयर सेब के अधीन है यानि प्रदेश में कुल फलोत्पादन क्षेत्र के करीब 49 फीसदी हिस्से पर सेब की पैदावार होती है। हिमाचल ने सेब उत्पादन में भी देश में एक अलग स्थान बनाया है और यहां देश की सेब फसल का करीब 38 फीसदी हिस्सा पैदा हो रहा है।

उल्लेखनीय है कि राज्य के चार जिलों शिमला, कुल्लू, किन्नौर, मंडी और चंबा में सेब प्रमुख नकदी फसल है। शिमला जिला के कोटखाई, जुब्बल और चौपाल का मड़ावग क्षेत्र, कोटगढ़ इलाका सेब के लिए प्रख्यात है। हिमाचल के सकल घरेलू उत्पाद में बागवानी क्षेत्र हर वर्ष 5,000 करोड़ रुपये से अधिक का योगदान दे रहा है।

सैमुअल इवांस स्टोक्स हैं हिमाचल में सेब के जनक

बता दें कि हिमाचल में सेब के जनक अमेरिकन सैमुअल इवांस स्टोक्स माने जाते हैं। सैमुअल स्टोक्स का जन्म 16 अगस्त, 1882 फिलाडेल्फिया, अमेरिका के अमीर घराने में हुआ था। वह हिमाचल 1905 में आए और अमेरिका से सेब के पौधे लाकर शिमला जिला के थानेदार के बारुबाग में 6 नवंबर, 1916 में पहला बगीचा लगाया। सत्यानंद स्टोक्स ने स्थानीय लोगों को भी सेब लगाने के लिए प्रेरित किया। तब इस क्षेत्र में नकदी फसलें नहीं होती थीं तथा लोग परंपरागत खेती करते थे।

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