भू-अधिग्रहण के कारण किसान खो रहे हैं अपनी सामाजिक प्रतिष्ठा: डॉ. महंत

रायपुर: छग कांग्रेस चुनाव अभियान समिति के अध्यक्ष व पूर्व केन्द्रीय मंत्री डॉ. चरणदास महंत द्वारा जारी हसदेव जन यात्रा अपने छठवें दिन सोमवार को कटघोरा विधानसभा क्षेत्र के हसदेव तट पर बसे गांवों में पहुंची। जगह-जगह डॉ. महंत व जन यात्रा में शामिल लोगों का आत्मीय स्वागत किया गया।

सभाओं में डॉ. महंत को सुनने और इस जन यात्रा से स्वयं को जोडने ग्रामीणों का रेला उमड़ रहा है। सोमवार को कटघोरा विधानसभा क्षेत्र के ग्राम लोतलोता, नवागांव, झाबू, पंडरीपानी, डिन्डोलभांठा, छिरहूट, तेलसरा, जमनीमुड़ा, घनाकछार, अरदा, विजयपुर, सिंघाली, ढेलवाडीह में हसदेव जन यात्रा पहुंची।

परंपरागत आत्मीय स्वागत के बाद जगह-जगह ली गई सभा में डॉ. महंत ने कहा कि कोरबा जिले में प्रदूषण का ग्राफ निरंतर बढ़ता जा रहा है। नई-नई खदान खुलने से वनों की अंधाधुंध कटाई हो रही है। वन विभाग, वन विकास निगम, एनटीपीसी, एसईसीएल व अन्य औद्योगिक संस्थान के विगत 10 वर्षों के आंकड़ों में लाखों पौधों का रोपण किया गया है लेकिन जमीनी स्तर पर 5 प्रतिशत पौधे भी नहीं हैं।

पर्यावरण संतुलन बनाने में व्यापक भ्रष्टाचार हुआ है। डॉ. महंत ने कहा कि कोरबा के विकास के नाम पर हजारों बस्तियां उजाड़ी गई लेकिन विकास के बदले तरह-तरह की बीमारियां, बेरोजगारी, प्रदूषण मिला है। आज किसान अपना अस्तित्व खो चुके हैं। उद्योगों, खदानों के लिए जमीन अधिग्रहण के कारण अब जमीन न होने से अपनी सामाजिक प्रतिष्ठा खोती जा रही है। हजारों किसानों की जमीन एसईसीएल द्वारा लीज पर ली गई थी, लीज अवधि खत्म होने पर भी जमीन वापस नहीं की गई है।

हजारों किसानों की जमीन उद्योग लगाने के लिए ली गई किन्तु न तो उद्योग लगाए गए और न ही किसानों को जमीन लौटायी गई। ऐसे उद्योगों के लिए ली गई जमीन किसानों को वापस करनी चाहिए। आज भी वनांचलों में ऐसी अनेक बस्तियां है जिनका व्यवस्थापन वन विभाग, राजस्व विभाग नहीं कर पाया है।

इससे आये दिन किसान प्रताडित होते रहते हैं। सरकार उद्योगों को पानी दे सकती है परंतु किसानों को देने के लिए पानी नहीं है। राष्ट्रपति के दत्तक पुत्र पहाड़ी कोरवाओं के लिए बनायी गई योजनाएं बंदरबाट की भेंट चढ़ती जा रही है। आये दिन भालुओं से आदिवासियों की मौत हो रही है, घायल हो रहे हैं परंतु की सरकार की जामवंत परियोजना का अता-पता नहीं है। हसदेव नदी संयंत्रों के राखड़ से पट कर अपना अस्तित्व खोते जा रही है।

प्लांटों का विषैला पानी इसमें बहाया जा रहा है जिसके कारण नदी के पानी का उपयोग करने वाले किसानों आदिवासियों, झुग्गीबस्ती वासियों में बीमारी फैल रही है। शासन इसकी रोकथाम के लिए गंभीर नहीं है। डॉ. महंत ने कहा कि संयंत्रों से निकली राख की व्यवस्था के लिए राखड़ बांध नहीं है, राखड़ का समुचित उपयोग नहीं हो पा रहा है।

कोरबा जिले की सड़कों पर भारी वाहनों का दबाव बढने से दुर्घटनाओं में लोगों की मौत हो रही है, औसतन हर दिन लोग घायल हो रहे हैं। शिक्षाकर्मियों, मितानिनों, आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं की दुर्दशा किसी से छिपी नहीं है।

जन यात्रा में डॉ. महंत के साथ प्रमुख रूप से कोरबा विधायक जयसिंह अग्रवाल, पूर्व विधायक बोधराम कंवर, पूर्व मंत्री नोबेल वर्मा, प्रदेश कांग्रेस सचिव गोपाल थवाईत, शहर कांग्रेस अध्यक्ष राजकिशोर प्रसाद, महामंत्री सुरेंद्र प्रताप जायसवाल, निगम सभापति धुरपाल सिंह कंवर, नगर पंचायत छुरीकला अध्यक्ष अशोक देवांगन, विनोद अग्रवाल, प्रशांत मिश्रा, मदन वैष्णव, गोपाल यादव, नरेश देवांगन, संतोष राठौर, मुन्ना साहू, महेेश अग्रवाल, एस मूर्ति, अशोक यादव सहित बड़ी संख्या में कांग्रेसजन व क्षेत्रवासी शामिल हुए।

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