छत्तीसगढ़

कई राजनीतिक पार्टियों के लिये यह संजीवनी साबित हो रहा किसान कानून

ब्यूरो चीफ:- विपुल मिश्रा

किसान कानून ने जहाँ देश में एक नकारात्मक माहौल बनाया है, वहीं कई राजनैतिक पार्टियों के लिये यह संजीवनी भी साबित हो रहा है, विशेषकर उत्तर प्रदेश में, अगर हम उत्तर प्रदेश में आन्दोलन के प्रभाव की बात करें तो यह गाँव गाँव तक अपनी जड़ें जमा रहा है, पंचायत चुनावों में चाय की दुकानों पर लोग खुलकर इस पर चर्चा करते नजर आ रहे हैं,

काँग्रेस ने लीड लिया- यह कहने में कतई गुरेज नही है कि किसान आन्दोलन में संघर्ष के मामले में काँग्रेस पार्टी ने सबसे बाजी मार लिया है, संगठन सृजन के माध्यम से न्याय पंचायत स्तर पर अपने पैर जमा रही काँग्रेस हर ब्लाक पर किसान चौपाल लगाकर सीधे संवाद की स्थिति में आ गयी है, और कई सालों बाद आम जनता में सकारात्मक संदेश देने में सफल हो रही है

प्रियंका गाँधी के नेतृत्व का असर- राष्ट्रीय महासचिव प्रियंका गाँधी का आक्रामक नेतृत्व भी इसमें सबसे ज्यादा महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है, जिस तरह से किसान पंचायतों में अपार जनता आ रही है वह भविष्य के लिये शुभ संकेत हो सकता है, सहारनपुर ,बिजनौर की किसान पंचायतों ने सत्ता पक्ष के साथ ही साथ अन्य दलों को भी सोचने पर मजबूर कर दिया है, काँग्रेसियों ने इस बार सपा और अन्य दलों को पीछे छोड़ दिया है, प्रियंका गाँधी की कोर कमेटी ने बहुत रणनीतिक तरीके से गोटियाँ बिछायी है,

काँग्रेस के प्रदेश इकाई के प्रमुख अजय लल्लू का संघर्षशील नेतृत्व भी ऊर्जा प्रदान कर रहा है, बड़े दिनों बाद पार्टी नेता एकजुट होकर संगठन के साथ खड़े दिख रहे हैं ,इससे जिले स्तर तक के कार्यकर्ताओं में संघर्ष की क्षमता और एकता देखने को मिल रही है,

विधानपरिषद सदस्य दीपक सिंह कहते हैं- कि काँग्रेस का इतिहास ही आन्दोलन का रहा है, हमारी सरकार में किसानों के जीवन स्तर में सुधार आया था, हम आगे भी किसानों के साथ खड़े रहेंगे

पूर्व केन्द्रीय मंत्री राजीव शुक्ला भी प्रियंका गाँधी के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश में काँग्रेस के वापसी के प्रति आशन्वित हैं,

सारांश में अगर कहा जाय कि प्रियंका गाँधी के स्पष्ट और संघर्षशील नेतृत्व में अगर 2022 मेँ काँग्रेस सत्ता के द्वार पर दस्तक देती नजर आये तो आश्चर्य नही होगा, जिसका आधार गाँव -गाँव संगठन तैयार हो रहा है, यही काँग्रेस के लिये सबसे फायदे की बात दिख रही है

राजेश तिवारी
लेखक युवा राजनैतिक विश्लेषक हैं

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