राष्ट्रीय

दिल्ली की ओर बढ़ रहे किसान, केंद्रीय मंत्री से मुलाकात के बाद भी नहीं बनी सहमती

लखनऊ से हेलिकॉप्टर के द्वारा 2 आईएएस किसानों से मिलने के लिए रवाना

नई दिल्ली :

50 हजार के करीब किसान गाजियाबाद के हिंडन घाट पर डेरा डाले हुए हैं। भारतीय किसान यूनियन के प्रतिनिधि की सोमवार देर शाम केंद्रीय गृह मंत्री राजनाथ सिंह से मुलाकात होनी थी, लेकिन नहीं हुई।

इसके बाद गाजियाबाद के हिंडन एयरबेस पर केंद्र के प्रतिनिधि के तौर पर यूपी के सीएम योगी आदित्यनाथ से मुलाकात कराई गई, लेकिन एक घंटे तक चली बातचीत बेनतीजा रही।

दिल्ली की ओर बढ़ रहे किसानों और केंद्रीय मंत्री बीरेंद्र सिंह के आवास पर सोमवार को बातचीत रात 2:30 बजे तक होने के बावजूद वहां भी कोई सहमति नहीं बनी और मामला बेनतीजा रही।

दिल्ली-मेरठ रोड जाम है और हजारों किसान दिल्ली में घुसने पर अड़े हैं। वहीं सरकार उन्हें रोकने पर अड़ी है।

किसानों ने शर्त रखी है कि सरकार के प्रतिनिधि केंद्रीय मंत्री बीरेंद्र सिंह बात करने मंगलवार को किसान घाट आएं। उन्होंने दिल्ली में घुसने पर रोक और धारा 144 हटाने की भी शर्त रखी।

लखनऊ से हेलिकॉप्टर के द्वारा 2 आईएएस किसानों से मिलने के लिए रवाना हो चुके हैं। इस दौरान ये भी सूचना मिल रही है कि किसानों की मुलाकात दोपहर 12 बजे गृहमंत्री से भी होगी।

इस समय किसान साहिबाबाद से होकर वैशाली के रास्ते कौशाम्बी से आनंद बिहार जाने वाले रास्ते पर टिके हुए हैं। किसानों के साथ महिला किसानों ने भी अपनी कमर कस ली है।

वहीं पुलिस अधिकारियों का कहना है कि किसानों को यूपी गेट से आगे नहीं जाने दिया जाएगा। मौके पर आरएएफ और भारी पुलिस बल तैनात कर दिया गया है।

बार्डर को पूरी तरह से सील कर दिया गया है। किसानों को गिरफ्तार करने के लिए बसों का भी इंतजाम किया गया है।

भाकियू नेता नरेश टिकैत ने कहा कि हमें यहां क्यों रोक दिया गया है? रैली एक अनुशासित तरीके से आगे बढ़ रही थी।

अगर हम सरकार को अपनी समस्याओं के बारे में नहीं कहेंगे तो किससे कहेंगे? क्या हम पाकिस्तान या बांग्लादेश से कहेंगे?

दिल्ली ट्रैफिक पुलिस ने गाजियाबाद, हापुड़, मेरठ, मुजफ्फरनगर, रुड़की और हरिद्वार जाने वाले लोगों से मेरठ एक्सप्रेसवे, गाजीपुर बार्डर न जाने की अपील की है।

लोग गाजीपुर चौक, रोड नंबर-56, आनंद विहार, अप्सरा बार्डर, जीटी रोड, मोहन नगर होकर गाजियाबाद जा सकते हैं। यात्रा में कई राज्यों के किसान शामिल हैं।

इनकी स्वामीनाथन कमेटी की सिफारिशों को लागू करने, आत्महत्या करने वाले किसानों के परिजनों का पुनर्वास समेत कई मांगें हैं।

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