छत्तीसगढ़

जवा फूल चावलों का रकबा बढाने बनाया जा रहा किसानों का संगठन

किसानों को खेती में मदद और सीधे बाजार से जुडऩे का मिलेगा दोहरा लाभ

हिमालय मुखर्जी ब्यूरो चीफ रायगढ़

रायगढ़, 8 नवम्बर 2020:  रायगढ़ जिले की पहचान लैलूंगा के जवा चांवलों की महक देश-प्रदेश में दूर तक पहुंचे इसके लिये उपज बढ़ाने के साथ इसकी व्यापक स्तर पर मार्केटिंग की दिशा में काम शुरू किया जा रहा है। इसके लिये कलेक्टर भीम सिंह की मार्गदर्शन में एफपीओ (किसान उत्पाद संगठन) बनाकर जवा फूल की खेती करने वाले किसानों को उसमे जोड़ा जायेगा। कलेक्टर भीम सिंह ने लैलूंगा के पहाड़ लुढेग व अन्य इलाकों में पहुंचकर वहां जवा फूल चावल की खेती को देखा तथा किसानों से चर्चा की। विधायक लैलूंगा चक्रधर सिंह सिदार एवं जिला पंचायत सीईओ ऋचा प्रकाश चौधरी भी इस दौरान उपस्थित रहे।जवा फूल चावलों का रकबा बढाने बनाया जा रहा किसानों का संगठन

चर्चा के दौरान किसानों ने बताया कि उपयुक्त बाजार नहीं मिलने के कारण स्थानीय व्यापारियों को ही चावल बेचना पड़ता है जिससे लागत के अनुसार आमदनी नही मिल पाती। इसलिए अधिकतर किसान दूसरे किस्म के चावलों की खेती कर रहे हैं। इन चावलों की मांग तो है लेकिन फसल सही कीमत नहीं मिल पाने के कारण पहले की तुलना में इसका रकबा काफी घट गया है। उपज का सही दाम मिलेगा तो क्षेत्र के ज्यादा किसान भी इसे उगाने में रूचि लेंगे। कृषि विभाग के अधिकारी ने बताया कि वर्तमान स्थिति में विकासखण्ड में लगभग 215 हेक्टेयर में जवा फूल चावल की खेती की जा रही है।

चावलों की ब्रांडिंग

कलेक्टर सिंह ने किसानों को बताया कि एफपीओ के गठन का उद्देश्य यही है कि जवा फूल उगाने वाले किसानों को संगठित कर उनकी आमदनी बढाने की दिशा में काम किया जाये। एफपीओ से जुडऩे से किसानों को दोहरा लाभ होगा। पहला इसके माध्यम से उन्हें खेती के लिये बीज, खाद, दवाइयों और कृषि यंत्रों के साथ उन्नत कृषि तकनीकों के जानकारी भी मिलेगी, दूसरा उन्हें सीधे बाजार से जोड़ा जायेगा। इसके लिये यहाँ उगाये जाने वाले चावलों की ब्रांडिंग की जाएगी और उनको मार्केट में बेचने के लिये एक व्यवस्थित सप्लाई चेन तैयार किया जायेगा। इससे किसानों का उत्पादन बढ़ेगा और उन्हें अपने फसल की सही कीमत भी मिलेगी। यह सारा काम एफपीओ के तहत होगा। जिससे क्षेत्र के चावलों की अपनी पहचान स्थापित हो।

कलेक्टर सिंह ने लैलूंगा विकासखण्ड के पहाड़ लूडेग ग्राम किसान संतोष के घर जाकर वहां पारंपरिक तरीके से ढेकी से धान की कुटाई को भी देखा। उन्होंने चावलों के स्थानीय स्तर पर ही मिलिंग के लिये कृषि विभाग के अधिकारियों को एक मिनी मिलिंग यूनिट प्रदान करने के निर्देश दिये।

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