छत्तीसगढ़

कनक के लिए वरदान बनी किसान समृद्धि योजना

नलकूप खनन एवं सिंचाई पंप की स्थापना से मिल रहा माटी महतारी का भरपूर आशीर्वाद

राजनांदगांव : छत्तीसगढ़ सरकार की अत्यंत महत्वाकांक्षी एवं कल्याणकारी योजनाओं में से किसान समृद्धि योजनान्तर्गत कराए गये नलकूप खनन एवं सिंचाई पंप की स्थापना जिले के आदिवासी बाहुल्य मानपुर विकासखंड के सुदूरवनांचल के ग्राम गुदारास के प्रगतिशील कृषक कनकराम राणा के लिए वरदान साबित हो रहा है। इस योजना के अंतर्गत कराये गए नलकूप खनन एवं लगाये गये तथा कनक के दिन रात मेहनत से माटी महतारी ेभरपूर आशीर्वाद दे रही है।

कभी दिन रात मेहनत करके एवं अपने फसलों के लिए पानी की प्रबंध हेतु केवल इन्द्रदेव पर आशीर्वाद रहने के कारण सहित उत्पादन से लेकर अपना घर चलाने वाले कनक की पहचान एवं आत्म निर्भर एवं प्रगतिशील कृषक के रूप में बन गया है। शासकीय योजनाओं के उचित उपयोग के साथ-साथ मेहनत, लगन तथा माटी महतारी के निरंतर सेवा से कनक ने यह साबित कर दिया है कि शासकीय योजनाएं कृषक के व्यवसाय में सुधार एवं बदलाव का महत्वपूर्ण जरिया बनती है। केवल आवश्यकता है सकारात्मक सोच, ईमानदारी से मेहनत तथा संसाधनों का सही उपयोग का।

अपने उन्नतशील खेती एवं व्यवसाय में हुए बदलाव के संबंध में जानकारी देते हुए कृषक कनक राम राणा ने बताया कि उनके पास अपने गृह ग्राम गुड़ारास में कुल 2.55 एकड़ जमीन है। किसान समृद्धि योजनान्तर्गत नलकूप खनन एवं सिंचाई पंप स्थापना के पूर्व वर्षा आश्रित धान फसल का उत्पादन कर अपना एवं अपने परिवार का भरण-पोषण करते थे। सिंचाई साधन एवं तकनीकी ज्ञान के अभाव में पहले प्रतिहेक्टयर में केवल 35 क्विंटल धान उत्पादन होता था।

जिससे लागत मूल्य को काटकर केवल 7 हजार रूपए ही वार्षिक आमदनी प्राप्त होती थी। वे बताते है कि कृषि विभाग के अधिकारियों से संपर्क से उन्हें राज्य शासन के कृषि समृद्धि योजनान्तर्गत नलकूप खनन एवं पंप स्थापना के संबंध में जानकारी प्राप्त हुई। उन्होंने कृषि विभाग के सहयोग से अनुदान पर नलकूप खनन एवं पंप स्थापना कराकर द्विफसली खेती के रूप में धान के बाद मक्का फसल का उत्पादन प्रारंभ किया।

इस कार्य में मुझे कृषि विभाग का निरंतर सहयोग एवं मार्गदर्शन मिलता रहा। कृषि विभाग द्वारा मुझे एवं मेरे साथ सम्मिलित अन्य कृषकों को राष्ट्रीय खाद्यान्न सुरक्षा मिशन एवं अन्य विभागीय योजनाओं के तहत उन्नत नवीन कृषि पद्धति से खेती करने के लिए आदान सामग्री उपलब्ध कराया गया।

इसके अलावा उन्हें फसल प्रदर्शन के माध्यम से भी लाभान्वित किया गया। जिसके परिणाम स्वरूप नवीन तकनीकी ज्ञान तथा उवर्रकों के संतुलित प्रबंधन के कारण मेरी कृषि लागत में कमी हुई। इसके साथ ही वर्तमान में मैं प्रति हेक्टेयर में 55 क्ंिवटल धान एवं 60 क्विंटल धान का उत्पादन करा रहा हूं। धान से प्राप्त उपज की बिक्री में मुझे 135000 रूपए तथा मक्का से मुझे 150000 रूपए वार्षिक आमदनी होती है। कृषि विभाग के सहयोग से आज मेरे पास स्वयं का टे्रक्टर है। जिसका उपयोग मैं स्वयं एवं ग्राम के अन्य किसान भाईयों के कृषि कार्य के लिए कर रहा हूं।

इसके अलावा मैं कृषि विभाग द्वारा संचालित किये जाने वाले कृषि प्रशिक्षणों तथा शैक्षणिक भ्रमण कार्यक्रमों में नियमित रूप से सहभागी निभाता हूं। जिससे प्राप्त ज्ञान का प्रसार में अपने गांव के कृषि विकास तथा किसान भाईयों के आर्थिक उन्नति के लिए करता हूं। इस तरह से कृषि विभाग के किसान समृद्धि मेरी खेती-किसानी की तकदीर एवं तस्वीर बदलकर मेरे एवं उन्नत एवं खुशहाल जीवन का आधार बन गया है।

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