औषधीय पौधों की उन्नत खेती देख-सीख कर लौटे प्रदेश के किसान

रायपुर : औषधीय एवं सगंधीय पादप अनुसंधान निदेशालय, आणंद, गुजरात से औषधीय पौधों के कृषिकरण के आधुनिक अध्ययन प्रवास से छत्तीसगढ़ के किसानों का दल आज शाम राजधानी रायपुर पहुंचे, जिनका स्वागत छत्तीसगढ़ राज्य औषधीय पादप बोर्ड के उपाध्यक्ष डॉ. जे.पी. शर्मा एवं मुख्य कार्यपालन अधिकारी शिरीष चन्द्र अग्रवाल द्वारा गर्मजोशी के साथ किया। उल्लेखनीय है कि छत्तीसगढ़ के नौ जिलों के 16 किसान और इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय के दो विद्यार्थी एक सप्ताह की अध्ययन यात्रा पर 14 फरवरी को रवाना हुए थे।

किसानों ने इस अवसर पर औषधीय पौधों के कृषिकरण के लिए राज्य से बाहर अध्ययन प्रवास का कार्यक्रम आयोजित करने के लिए राज्य सरकार और औषधीय पादप बोर्ड के पदाधिकारियों के प्रति आभार व्यक्त किए। उन्होंने कहा कि वे वहां से बहुत कुछ सीखकर आये है, इसेे अन्य किसानों को भी बताएंगे तथा औषधीय पौधों के खेती करने के लिए प्रेरित करेंगे तथा औषधीय पौधों की खेती से कितना अधिक लाभ हो सकता है, इसका प्रचार-प्रसार कर राज्य के किसानों को प्रोत्साहित करेंगे।

किसानों ने बताया कि प्रशिक्षण कार्यक्रम में देश भर से आठ राज्यों के कृषक भी आए थे, जिसमें सबसे ज्यादा संख्या छत्तीसगढ़ के किसानों की थी । छत्तीसगढ़ के किसानों के ज्ञान एवं जिज्ञासा को देखते हुए वहां के सभी किसानों तथा संस्थान के निदेशक किसानों को वैज्ञानिक किसानों की श्रेणी से संबोधित करते थे तथा औषधीय पौधों की खेती सभी आधुनिक तकनीकों, बाजार कम से कम लागत एवं अधिक से अधिक मूल्य प्राप्त हो सके की जानकारी रोजाना प्रदान की जाती थी । प्रशिक्षण से उत्साहित किसानों ने यह भी कहा अब वे खेती को जीविकोपार्जन के बजाय व्यापार की तरह करेंगे ।

इस अवसर पर बोर्ड मुख्य कार्यपालन अधिकारी ने आवश्वासन दिलाया कि औषधीय पौधों के कच्चे उपजों के लिए बाजार उपलब्ध कराने के लिए बोर्ड हर संभव प्रयास करेगा तथा उन्हे कच्चे माल का अधिक से अधिक मूल्य दिलाने के लिए कार्य करेगा । बोर्ड के उपाध्यक्ष डॉ. जे.पी. शर्मा ने इस मौके पर यह आश्वासन दिया कि औषधीय पौधों की खेती में मृदा परिक्षण जो भी व्यय होगा उसे बोर्ड वहन करेगा तथा सोलर सिस्टम से स्थापित होने वाले पंप के लिए भी जल्द से जल्द कार्यवाही की जावेगी।

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