कैश के लिए दर-दर भटक रहे हैं धान बेच चूके किसान

सुबह से शाम तक बैंकों का चक्कर लगाने के बाद 50 हजार मांगने पर मिलते हैं 2 हजार

राज शार्दूल

कोंडागांव।

राज्य सरकार किसानों की समस्याओं के प्रति गंभीर दिखाई दे रही है किंतु स्थानीय अधिकारियों की उदासीनता के चलते सरकार की योजनाओं पर बट्टा लग रहा है वहीं किसानों एवं हितग्राहियों को अधिकारियों की लापरवाही का खामियाजा भुगतना पड़ रहा है।

इन दिनों धान बेच चुके किसान कैश के लिए दर-दर भटक रहे हैं। बैंक के अधिकारी किसानों की समस्या के प्रति गंभीर होते तो किसानों की समस्या अवश्य कम होती किंतु बैंकों के अधिकारी एक दूसरे के ऊपर आरोप लगाने में लगे हैं। जिला सहकारी बैंक एवं राज्य ग्रामीण बैंक के अधिकारी स्टेट बैंक पर असहयोग का आरोप लगाते रहे हैं।

जिला सहकारी बैंक के हितग्राही ज्यादा परेशान

जिला सहकारी बैंक के अधिकारी किसानों की परेशानियों को गंभीरता से नहीं ले रहे हैं जिससे किसानों की स्थिति बद से बदतर होती जा रही है। किसान सुबह से शाम तक सिर्फ बैंकों कि चक्कर लगाते फिर रहे हैं।

इन दिनों कैश के मामले मे जिले के सभी बैंकों में कमोबेश एक जैसी स्थिति है किंतु जिला सहकारी बैंक की शाखा विश्रामपुरी में स्थिति कुछ ज्यादा ही खराब है। विश्रामपुरी के कृषकों की मानें तो धान बेचने के बाद वे बैंक के चक्कर लगाने के अलावा और कोई दूसरा कार्य नहीं कर पा रहे हैं। कई किसान ऐसे हैं जो सुबह उठते ही बैंक जाने की तैयारी में लगे रहते हैं।

विश्रामपुरी से 20 से 30 किलोमीटर दूर से किसान साइकल मोटरसाइकिल एवं अन्य साधनों से पहुंचते हैं इस स्थिति में उनको सुबह 8 बजे ही घर से निकलना पड़ता है। बावजूद इसके कई बार उन्हें खाली हाथ निराश लौटना पड़ रहा है। किसानों की शिकायत है कि वह 50 हजार का विड्रोल फॉर्म भरते हैं तो उन्हें 2 हजार से लेकर अधिकतम 5 हजार तक की ही रकम दी जाती है।

किसानों को एटीएम भी जारी कर दिया गया है किंतु केशकाल स्थित एटीएम में जहां लंबी लाइन लगाकर धक्का खाना पड़ रहा है। वहीं विश्रामपुरी का एटीएम माह से बंद पड़ा है। विश्रामपुरी में एटीएम मे रकम नहीं डालने के कारण एटीएम पर शटर गिराकर ताला जड़ दिया गया है। यह यहां का एकमात्र एटीएम है।

विश्रामपुरी बड़े राजपुर क्षेत्र के किसानों का आरोप है कि जिला सहकारी बैंक विश्रामपुरी की शाखा प्रबंधक किसानों की समस्या के प्रति कतई गंभीर नहीं है । किसानों का कहना है कि केशकाल स्टेट बैंक से रकम लाने पर 1 घंटे या डेढ़ घंटे का वक्त लग सकता है।

वहीं कोण्डागांव से भी दो से ढाई घंटा लगता है किंतु मैडम यहां से 3 से 4 बजे के बीच आती हैं तब तक किसान दिन भर बैठे बैठे परेशान हो जाते हैं। यह किसानों की प्रताड़ना जैसी स्थिति है । उसके बाद भी ऐसा नहीं है कि बैंक के अधिकारी जब यहां पहुंचते हैं तो किसानों को मनचाही रकम मिल जाएगी।

दिन भर परेशान होने के बाद किसानों को कभी दो हजार तो कभी 5 हजार रुपये ही दिये जा रहे हैं। किसानों ने यह भी आरोप लगाया है कि जिला सहकारी बैंक के अधिकारी चेहरे देखकर रकम देते हैं। प्रभावशाली लोगों को मनचाहा रकम मिल जाता है किन्तु आम लोगों एवं गरीब किसानों को परेशान होना पड़ रहा है।

ग्राम पलना निवासी चरणसिंह कलार मारंगपुरी निवासी साधु राम मरकाम एवं बालेंगा राहटी पारा के मंगला राम नेताम केराडीही निवासी आसमान नेताम, हीरा सिंह मरकाम ने बताया कि वे सुबह 8 बजे से ही बैंक जाने की तैयारी में लगे रहते हैं। बैंक पहुंचने पर वहां रकम नहीं होने की बात कही जाती है।

तत्पश्चात वे वहां दिन बैठे रहते हैं। कभी-कभी यह भी कहा जाता है कि बैंक के शाखा प्रबंधक स्टेट बैंक कोण्डागांव या केशकाल गई हैं । जब पैसे लेकर आएंगे तो मिल पाएगा। वे वहां शाम तक इंतजार करते हैं। जब शाखा प्रबंधक पैसे लेकर आती हैं तो इंतजार कर रहे किसानों में रकम पाने को लेकर कोहराम मच जाता है।

भीड़भाड़ के चक्कर में कई किसान बिना पैसे लिए बैरंग ही लौट जाते हैं तो कुछ लोगों को थोड़ी थोड़ी रकम दे दी जाती है। किसानों ने बताया कि वह काफी दिनों से बैंकों का चक्कर लगा रहे हैं। किसानों को बैंक का 8 से 10 चक्कर लगाना पड़ रहा है।

रकम के लिए बाहर जाना पड़ता है : शाखा प्रबंधक

जिला सहकारी बैंक विश्रामपुरी की शाखा प्रबंधक हीरा लक्ष्मी शाह ने कहा कि पैसे के लिए कभी केशकाल, कोंडागांव तो कभी जगदलपुर तक जाना पड़ता है।

वहां से वापस आने में देर जरूर होती है किंतु किसानों को बराबर बराबर रकम दी जा रही है। इस सवाल पर कि किसानों को चेहरे देखकर पैसे दिए जा रहे हैं उन्होंने कहा कि यह कैशियर की जिम्मेदारी है कि वह रकम का वितरण किस प्रकार करते हैं अगर ऐसा कर रहे हैं तो यह कैसियर की ही गलती है।

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