खेतो में पड़ रही दरारे, सिचाई विभाग की लापरवाही का खामियाजा भुगत रहे किसान

सिचाई पानी के अभाव में जल रही फसल

– राजशेखर नायर

नगरी: नगरी बिरनपुर के किसान इन दिनों भीषण गर्मी में भी अपने फसल की रक्षा के लिए जूटे हुए है किंतु इनकी सब मेहनत बेकार साबित हो रही है क्योंकि सिचाई विभाग द्वारा सोंढूर से छोड़ा जा रहा पानी इनके खेतो तक पहुच ही नही पा रहा है।

सरकार द्वारा रबी फसल के लिए पर्याप्त पानी दिए जाने की घोषणा के बाद इन किसानों ने अपने खेतों में कर्ज लेकर धान की फसल लगाई थी शुरुआत में तो सोंढूर बांध का पानी इनके खेतो तक पहुँचा जिससे इन कृषको को अच्छी फसल लेने की आस जगी और अपने खेतों में खाद,

कीटनाशक आदि का प्रयोग कर फसल को तैयार कर लिया किन्तु इन भीषण गर्मी के समय जब धन के पौधों पर बाली आने का समय हुआ तभी सिचाई व्यवस्था पूरी तरह ठप्प हो गई और नाली से पानी आना बंद हो गया फलस्वरूप इनके खेतो में लगे धान के पौधे जल कर मारने लगे है और खेतों में दरारे आने लगी है।

कृषक परमेश्वर, सतन, हेमलाल, मुकेश, तुलसी, योगेश, उमेश ध्रुव, अवध साहू, भरत साहू, माखन वैष्णव आदि ने बताया कि लगभग 30 एकड़ की फसल बिना सिचाई पानी के बर्बाद होने के कगार पर है।

सिचाई विभाग के अधिकारियों को कई बार इस संबंध में अवगत कराया गया किन्तु अब तक कोई ठोस कदम नही उठाया गया है जिसका खामियाजा ये किसान आज उठा रहे है। ज्ञात हो कि नगरी बिरनपुर के खेतों में पानी भैसा सांकरा मोदे कि तरफ से आता है किंतु इस नहर नाली में अवैध कुलापो की बाड़ सी है.

जिसे जल संसाधन विभाग का सरंक्षण मिला हुआ है जिसके परिणाम स्वरूप इन किसानों के 30 एकड़ फसल बर्बाद होने के कगार पर है। नहर नाली लाइनिंग के कार्य मे भी खुल कर भ्रष्टाचार
किसानों के खेतों तक सिचाई पानी पहुचाने के उद्देश्य से जल संसाधन विभाग के वितरक शाखा द्वारा नहर नाली के लाइनिंग का कार्य कराया गया है किंतु इन कार्यो में महज खाना पूर्ति कर ठेकेदार व अधिकारियों ने बन्दर बाट कर ली है ऐसा कहना इस क्षेत्र के किसानों का है।

नाली के लाइनिंग का कार्य किये महज साल भर भी नही हुए किन्तु जगह जगह टूटी हुई नालियां इस निर्माण कार्य के गुणवत्ता की चुगली करती नजर आ रही है। क्षेत्र के किसानों ने जिलाधीश रजत बंसल से मांग की है कि उनके फसल की रक्षा के लिए खेतो तक पानी पहुचाने के लिए सिचाई विभाग को आदेशित करे व नहर नाली के लाइनिंग के कार्य की जांच कर अधिकारियों व निर्माण एजेसी पर कार्यवाही करें।

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