ग्रीष्मकालीन धान के स्थान पर मक्का फसल की ओर बढ़ा किसानों का रूझान

मनीष शर्मा:

मुंगेली: ग्रीष्मकालीन धान के स्थान पर मक्का फसल की ओर किसानों का रूझान बढ़ा है। ग्रीष्मकालीन धान की तुलना में मक्का की खेती में सिंचाई की आवश्यकता कम पड़ती है। कम लागत में अधिक उत्पादन होता है। साथ ही कीट व्याधी का प्रकोप भी नगण्य होता है।

इसे देखते हुए जिले के विकासखण्ड पथरिया के ग्राम धूमा एवं सल्फा के कृषक शांति राजपूत, पोषण राजपूत, बंशी लाल और संतोष निषाद द्वारा अपने खेतों में मक्के की फसल लिया जा रहा है। आज उनके खेतों में मक्का की फसल लहलहा रहा है।

जिले के विकासखण्ड पथरिया ग्राम धूमा एवं सल्फा के कृषक शांति राजपूत, पोषण राजपूत, बंशी लाल और संतोष निषाद ने बताया कि ग्रीष्मकालीन धान के उत्पादन में अधिक पानी की आवश्यकता होती है। लेकिन मक्का कम समय और कम पानी में तैयार होने वाले लाभकारी फसल है।

साथ ही कीट व्याधी का प्रकोप भी नगण्य होता है। मक्के की फसल में कम लागत आने के कारण किसानों को आर्थिक परेशानी भी नहीं होती। उनके खेतों में मक्का की फसल तैयार हो गया है। वे समर्थन मूल्य 1 हजार 760 रूपए प्रति क्विंटल की दर से कृषि उपज मण्डी में मक्का की बिक्री कर आर्थिक रूप से स्वावलंबी बनेंगे।

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