ड्रिप सिंचाई योजना से किसानों को होगा लाभ, यूपी में 30 हजार हेक्टेयर गन्ना क्षेत्र में लगाया जाएगा ड्रिप सिंचाई संयंत्र

सिंचाई के जरिए एक-एक बूंद का उपयोग करने के दिशा में कई पहल की जा रही है। इससे न सिर्फ जल संरक्षण हो रहा है, बल्कि कम पानी वाले इलाकों में भी फसल को भरपूर मात्रा में पानी मिल सकता है और उत्पादन को भी बढ़ाया जा सकता है। उत्तर प्रदेश में गन्ना विकास विभाग ने भी इस ओप पहल की है और सिंचाई के जरिए किसानों को बड़ी राहत देने जा रहा है।

ड्रिप सिंचाई से 50 से 60 प्रतिशत पानी की बचत

दरअसल, विभाग 2021-22 में 30 हजार हेक्टेयर गन्ना क्षेत्र में ड्रिप सिंचाई संयंत्र लगाएगा। इससे किसानों को सिंचाई जल की बचत होगी और उपज में बढ़ोत्तरी भी होगी। ड्रिप सिंचाई के जरिए सिंचाई जल के उपयोग में 50 से 60 प्रतिशत पानी की बचत होगी।

योजना के लिए 2,566 किसानों का चयन

कोरोना काल में चीनी मिलों का संचालन हो या फिर गन्ना किसानों को समय पर भुगतान। प्रदेश सरकार किसानों को सहूलियत देने के साथ उनकी आमदनी बढ़ाने का काम कर रही है। इसमें गन्ना विकास विभाग ड्रिप सिंचाई के जरिए पानी बचाने की तकनीक से किसानों को समृद्ध बनाने जा रही है। गन्ना विभाग के अनुसार ड्रिप सिंचाई योजना के लिए प्रदेश के 2,566 किसानों का चयन किया गया है, जिनको इसका लाभ दिया जाएगा।

छोटे गन्ना किसानों को होगा फायदा

विभाग के अनुसार इस तकनीक से एक और बड़ा लाभ भी होगा, इससे भूगर्भ जल के दोहन में काफी कमी आएगी। पेराई सत्र 2021-22 में 30 हजार हेक्टेयर गन्ना क्षेत्र में ड्रिप सिंचाई संयंत्र लगाए जाने की योजना है। इसके बाद योजना का दायरा बढ़ाया जाएगा। विभाग के अनुसार, इस योजना से छोटे गन्ना किसानों को बड़ फायदा मिलेगा। गन्ना खेती से उनकी आमदनी में इजाफा होगा।

क्या है ड्रिप सिंचाई

सिंचाई में पानी एक-एक बूंद का प्रयोग करने के लिए सरकार ने ”प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना” चलाई है, जिसके अंतर्गत सिंचाई की आधुनिक तकनीकों का इस्तेमाल करने पर जोर दिया गया है और पानी को पौधों की जड़ों पर बूंद-बूंद करके टपकाया जाता है। इस कार्य के लिए पाइप, नलियों तथा एमिटर का नेटवर्क लगाना पड़ता है। इसे ‘टपक सिंचाई’ या ‘बूंद-बूंद सिंचाई’ भी कहते हैं। इसके जरिए पानी थोड़ी-थोड़ी मात्र में, कम अंतराल पर सीधा पौधों की जड़ों तक पहुंचाया जाता है।

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