5 जून को संपूर्ण क्रांति दिवस मनाएंगे किसान, जलाई जाएंगी कृषि कानूनों की प्रतियां

अधिक से अधिक किसानों से शामिल होने का आह्वान किया गया

नई दिल्ली:कृषि कानूनों के खिलाफ दिल्ली की सीमाओं पर किसानों के विरोध प्रदर्शन के बीच शनिवार को संयुक्त किसान मोर्चा (SKM) की बैठक हुई, जिसमें निर्णय लिया गया कि आने वाली 5 जून को ‘संपूर्ण क्रांति दिवस’ मनाया जाएगा.

5 जून को भाजपा सांसद, विधायक व जनप्रतिनिधियों के कार्यालयों के सामने कृषि कानूनों की प्रतियां जलाई जाएंगी क्योंकि कृषि कानूनों के लिए 5 जून को विधेयक पास किया गया था। किसान नेताओं ने यह भी साफ कर दिया है कि इसको लेकर किसी तरह के टकराव की स्थिति से बचना है।

वहीं कुंडली बॉर्डर पर शनिवार को किसानों के कई जत्थे पहुंचे और इस तरह से बॉर्डर पर दोबारा से भीड़ बढ़ाई जा रही है। कुंडली बॉर्डर पर शनिवार को संयुक्त किसान मोर्चा की बैठक में आंदोलन की अगली रणनीति तय की गई। जिसको लेकर बलबीर सिंह राजेवाल, दर्शन पाल, गुरनाम सिंह चढूनी, हनान मौला, जगजीत सिंह दल्लेवाल, जोगिंदर सिंह उगराहां, युद्धवीर सिंह, योगेंद्र यादव, अभिमन्यु कोहाड़ ने बताया कि पिछले साल 5 जून को कोरोना काल के बीच ही कृषि कानून बनाने के लिए विधेयक पास किया था।

इसके साथ ही 5 जून 1974 को जयप्रकाश नारायण ने संपूर्ण क्रांति का नारा देते हुए देश में जन आंदोलन खड़ा किया था। इसलिए ही 5 जून को संपूर्ण क्रांति दिवस मनाने का फैसला लिया गया है, जिसमें अधिक से अधिक किसानों से शामिल होने का आह्वान किया गया है।

वहीं संयुक्त किसान मोर्चा ने पूर्व प्रधानमंत्री व किसान नेता स्व. चौधरी चरण सिंह की पुण्यतिथि मनाते हुए उनको श्रद्धांजलि अर्पित की। किसान नेताओं ने कहा कि खेती, किसान और गांव के विकास में उनके योगदान को कभी नहीं भुलाया जा सकता है।

चौधरी चरण सिंह असल मायनों में देश को आत्मनिर्भर बनाना चाहते थे, जिससे किसान के साथ ही मजदूर व गांव के लोग खुशहाल रह सके। किसानों ने उनको सबसे बड़ा किसान नेता बताया। संयुक्त किसान मोर्चा के नेताओं ने किसान घाट पहुंचकर भी स्व. चौधरी चरण सिंह को श्रद्धांजलि अर्पित की।

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