ज्योतिष

पितृ अमावस्या: श्राद्ध का अंतिम दिन, पितरों को ऐसे करें तृप्त

सर्वपितृ अमावस्या, पितृमोक्ष अमावस्या, पितृ अमावस्या, महालय अमावस्या भी कहा जाता है

23 सितंबर से शुरू हुआ पिंडदान का यह सिलसिला कल अपने अंतिम चरम पर पहुंच चुका है। 8 अक्टूबर सोमवार को सर्वपितृ अमावस्या है।

ज्योतिष के अनुसार पितृपक्ष माह का समापन आश्विन माह की कृष्ण अमावस्या के दिन होता है जो श्राद्ध का अंतिम दिन माना जाता है यानि पितृ पक्ष की अमावस्या का दिन पितरों को तृप्त करने का आखिरी दिन होता है।

इस अमावस्या को सर्वपितृ अमावस्या, पितृमोक्ष अमावस्या, पितृ अमावस्या, महालय अमावस्या भी कहा जाता है।

ज्योतिषियों के अनुसार, सर्वपितृ अमावस्या के दिन ज्ञात-अज्ञात पितरों का श्राद्ध किया जाता है। कहने का भाव है जिन पितरों का नाम याद न हो या उनके बारे में कोई जानकारी न हो ऐसे पितरों का श्राद्ध अमावस्या को किया जाता है।

इसी दिन से दशहरा महोत्सव की शुरूआत भी होती है। महालया, नवरात्र के प्रारंभ और पितृपक्ष के अंत का प्रतीक है। मान्यता है कि इस दिन पितृ हमसे विदा लेते हैं। इसलिए इस दिन सभी पितरों का स्मरण करना अच्छा माना जाता है।

जो लोग अन्य तिथियों में अपने पूर्वजों का तर्पण नहीं कर पाते वे पूर्वजों की आत्मा की शांति के लिए इसी दिन श्राद्ध करते हैं।’

अगर पितरों की मृत्यु तिथि याद न हो तो इस दिन श्राद्ध किया जा सकता है। यही कारण है कि इसे सर्वपितृ मोक्ष अमावस्या कहा जाता है।

इस दिन सूर्योदय के समय सूर्य को जल अर्पित करना बहुत शुभ होता है। इसके साथ ही पवित्र नदियों में स्नान करना और घर में बने भोजन में से सर्वप्रथम गाय के लिए, फिर श्वान के लिए, कौए के लिए, चीटियों के लिए भोजन का अंश प्रदान करने से भी पितर प्रसन्न होते हैं।

आखिर में पितरों को श्रद्धापूर्वक विधि-विधान से विदा कर और उनसे आशीर्वाद की प्रार्थना करें और उनके लिए खीर बनाएं। नारियल पर सिंदूर से स्वास्तिक बनाकर उसे हनुमान मंदिर में अर्पित करें।

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