धमाकों की जांच में एफबीआई हुई शामिल, 58 गिरफ्तार, लंदन में पढ़ा था एक आतंकी

कोलंबो। श्रीलंका में अमेरिकी दूतावास ने कहा है कि रविवार को हुए बम धमाकों की जांच में सहायता देने के लिए फेडरल ब्यूरो ऑफ इन्वेस्टिगेशन (FBI) शामिल हो गया है। यह जानकारी श्रीलंका में अमेरिकी राजदूत एलिना टेपलिज ने दी। इन धमाकों में मरने वालों की संख्या अब बढ़कर 359 हो चुकी है, जबकि 500 से अधिक लोग घायल बताए जा रहे हैं। पुलिस प्रवक्ता रूवान गुनसेकरा ने कहा कि अब तक द्वीप के विभिन्न क्षेत्रों से 58 संदिग्धों को गिरफ्तार किया गया है।

गुनसेकरा ने बताया कि बुधवार तड़के कम से कम 18 और संदिग्धों को हिरासत में लिया गया है। कोलंबो से करीब 56 किमी दूर वारकापोला के एक घर से पुलिस ने वॉकी-टॉकी और एक मोटरसाइकिल भी बरामद की। प्रधानमंत्री रानिल विक्रमसिंघे ने मंगलवार को चेतावनी दी थी कि कई संदिग्ध अभी भी विस्फोटक से लैस हैं और वे अभी भी पुलिस की गिरफ्त से बाहर हैं।

श्रीलंका के एक शीर्ष सरकारी अधिकारी ने मंगलवार को दावा किया कि मार्च में न्यूजीलैंड की मस्जिद नरसंहार का बदला लेने के लिए जवाबी कार्रवाई में इस्लामी कट्टरपंथियों ने गिरजाघरों, होटलों और अन्य स्थलों पर बम विस्फोट किए गए थे। इस मामले में बुधवार को न्यूजीलैंड की प्रधानमंत्री जेसिंडा अर्डेन ने कहा कि उन्हें ऐसी कोई खुफिया जानकारी नहीं मिली है, जिससे पता चले कि श्रीलंका में हुए आतंकी हमले क्राइस्टचर्च की मस्जिद में हुई गोलीबारी का प्रतिशोध था।

विक्रमसिंघे ने कहा कि जांचकर्ता अभी भी हमलावरों के विदेशी संबंधों को स्थापित करने की कोशिश कर रहे हैं। हमले में शामिल नौ में से आठ आतंकियों की पहचान कर ली गई है, और उनमें से एक महिला शामिल है। श्रीलंका में अमेरिकी राजदूत ने इस बात की पुष्टि की है कि अमेरिका को हमले के बारे में पहले से कोई जानकारी नहीं थी और उसने इसके बारे में कोई चेतावनी जारी नहीं की थी। उनका यह बयान श्रीलंका सरकार के द्वारा पूर्व में दी गई उस जानकारी का विरोधाभासी है, जिसमें श्रीलंका के मंत्री हर्षा डी सिल्वा ने सोमवार को सीएनएन को बताया कि भारत और अमेरिका दोनों ने पहले ही खुफिया जानकारी दी थी। अमेरिकी राजदूत ने कहा कि हमें हमले की कोई पूर्व जानकारी नहीं थी।

श्रीलंकाई सरकार ने खुफिया जानकारी हासिल करने और जानकारी साझा करने हुई चूक की बात को स्वीकार किया है। श्रीलंका के स्टेट डिफेंस मिनिस्टर के अनुसार, कोलंबो के अधिकांश आत्मघाती हमलावर पढ़े-लिखे थे और ऐसा माना जाता है कि उनमें से एक ने ब्रिटेन में पढ़ाई की थी।

Back to top button