जावेड़कर ने बताया शिक्षण संस्थानों में छात्राओं का एनरोलमेंट कम

नई दिल्लीः मानव संसाधन विकास मंत्री प्रकाश जावड़ेकर ने गुरुवार को राज्यसभा में बताया कि जियो इंस्टीट्यूट को विशिष्ट संस्थान (इंस्टीट्यूट ऑफ एमिनेंस) का महज आशय पत्र दिया गया है। इससे पहले जियो इंस्टीट्यूट को ‘उत्कृष्ट संस्थान’ का दर्जा प्रदान करने का विवाद सदन में उठा। राज्यसभा के कई सदस्यों ने भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी) और दशकों से कीर्तिमान स्थापित करने वाले अन्य संस्थानों के साथ उस संस्थान की रैंकिंग करने को लेकर सवाल किया, जो अभी आने वाला है।

वहीं आपको बता दें, जावड़ेकर ने देश के 6 शिक्षण संस्थानों को उत्कृष्ट संस्थानों का दर्जा दिया है। इन संस्थानों में 3 सरकारी और 3 निजी संस्थान शामिल हैं। इन निजी संस्थानों में एक ऐसा नाम भी सामने आया जिसका नाम न ही प्रचलित था और न ही उसे उत्कृष्ट संस्थानों में शामिल किया है। इस संस्थान का नाम है जियो इंस्टीट्यूट। खास बात ये है कि इस जियो इंस्टीट्यूट का नाम भी पहले नहीं सुना गया और इंटरनेट पर भी इसका अस्तित्व नहीं दिख रहा है। लेकिन फिर भी इसे उत्कृष्ट संस्थान का दर्जा दिया गया। सरकार की ओर एक ‘बिना अस्तित्व’ वाले कॉलेज या यूनिवर्सिटी को उत्कृष्ट संस्थान में शामिल करने से कई सवाल खड़े हो रहे हैं।

उधर राष्ट्रीय महत्व संस्थानों में महिला छात्राओं का नामांकन सबसे कम है, इसका खुलासा ऑल इंडिया सर्वे ऑफ हायर एजुकेशन (एआईएसएचई) के सर्वे में हुआ। मानव संसाधन विकास मंत्री प्रकाश जावड़ेकर द्वारा जारी रिपोर्ट अनुसार देश में उच्च शिक्षा में ग्रॉस एनरोलमेंट रेश्यो (जीईआर) 25.8 प्रतिशत है, जिसकी गणना 18-23 वर्ष आयु वर्ग के लिए की जाती है।

उच्च शिक्षा में इसका कुल नामांकन 36.6 मिलियन होने का अनुमान है जिसमें 19 .2 मिलियन लड़के और 17.4 मिलियन लड़कियों की भागीदारी है जबकि 2017-18 के सर्वेक्षण अनुसार 47.6 प्रतिशत लड़कियां हैं। उन्होंने बताया कि पुरुष आबादी के लिए जीईआर 26.3 प्रतिशत है और महिलाओं के लिए यह 25.4 प्रतिशत है। अनुसूचित जातियों के लिए यह 21.8 प्रतिशत और अनुसूचित जनजातियों के लिए 25.8 प्रतिशत के राष्ट्रीय जीईआर की तुलना में यह 15.9 प्रतिशत है।

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