छत्तीसगढ़

सरगुजा विश्वविद्यालय में धूमधाम से स्थापना दिवस समारोह सम्पन्न

सरगुजा विश्वविद्यालय, अम्बिकापुर का दशम् स्थापना दिवस धूूमधाम से सम्पन्न हुआ। कार्यक्रम का शुभारंभ अतिथियों द्वारा मां सरस्वती के चित्र पर माल्यार्पण और दीप प्रज्वलन से हुआ। कार्यक्रम के प्रारंभ में कुलपति प्रो. रोहिणी प्रसाद द्वारा मूख्य अतिथि गोपाल जी व्यास (प्रसिद्ध समाजसेवी एवं पूर्व राज्यसभा सदस्य) और विशिष्ट अतिथि ओ.पी. अग्रवाल (वृक्षमित्र) का पुष्पगुच्छ से स्वागत किया गया। समस्त अतिथियों का परिचय कराते हुए प्रो. मधुर मोहन रंगा ने कहा कि अर्थशास्त्र धर्मशास्त्र के द्वारा अनुशासित होना चाहिए। विशिष्ट अतिथि ओ.पी. अग्रवाल ने एक वर्ष की अवधि में कुलपति जी के द्वारा विश्वविद्यालयीन प्रगति का उल्लेख करते हुए बताया कि विश्वविद्यालय निरंतर आगे बढ रहा है। इनके प्रयास से भकुरा नव परिसर में 50 हजार पौधों का रोपण किया गया। इनकी इच्छाशक्ति से विश्वविद्यालय शीघ्र सिरमौर बनेगा।

मूख्य अतिथि, प्रसिद्ध समाजसेवी एवं पूर्व राज्यसभा सदस्य गोपाल जी व्यास ने विश्वविद्यालय के दशम् स्थापना दिवस के अवसर पर कहा कि छत्तीसगढ की जब बात होती है तो बस्तर और सरगुजा का नाम सबसे पहले लिया जाता है। उन्होंने कहा कि सरगुजा में जब तक भारतीय राजाओं का राज्य था तब तक यहां मिशनरियां नहीं थीं। उन्होंने कहा कि नालन्दा और तक्षशिला से निकले छात्रों ने पूरी दुनिया में हिन्दू संस्कृति को स्थापित किया है क्योंकि आज भी पूरी दुनिया में हिन्दू संस्कृति और धर्म के चिन्ह पुरातत्व के रूप में प्राप्त होते हंै। उन्होंने भारतीय संस्कृति को आगे बढाने के लिए सरगुजा विश्वविद्यालय को शुभकामनाएं दी। उन्होंने कहा कि यह विश्वविद्यालय दुनिया का ऐसा विश्वविद्यालय बनें जहां चन्द्रगुप्त जैसा शिष्य और चाणक्य जैसा आचार्य निर्मित करें। उन्होंने छत्तीसगढ़ शासन द्वारा आज के दिन विश्वविद्यालय के नए नामकरण के लिए कुलपति जी को प्रस्तावित किया। तदुपरांत कुलपति जी ने शासन के पत्र के निर्देशानुसार विश्वविद्यालय का नामकरण करते हुए संत गहिरा गुरू विश्वविद्यालय, अम्बिकापुर (छत्तीसगढ़) की घोषणा की।

कार्यक्रम में सरगुजा वन मंडलाधिकारी श्रीमती प्रियंका पांडे ने कहा कि यहां के विद्यार्थी प्राचीन परंपरा एवं संस्कृति के ज्ञान को प्राप्त करते हुए नवीन ज्ञान को भी प्राप्त करंेगे। यह हम सब के लिए सौभाग्य का विषय है। कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए कुलपति प्रो. रोहिणी प्रसाद ने वर्ष पर्यन्त की गतिविधियों का रेखांकन प्रस्तुत करते हुए कहा कि विश्वविद्यालय परिवार के सहयोग से हम आगे बढ़ रहे है क्योंकि हम एक सूत्र में बंधकर कार्य कर रहे हैं। उन्हांेने सभी कर्मचारियों को आहवान करते हुए कहा कि हमें अब दुगुना काम करना है। कुलपति जी ने बताया कि मुख्यमंत्री जी ने भूमिपूजन के दिन संत गहिरा गुरू शोधपीठ दिया था इसके माध्यम से हमें नए ढंग का शोधकार्य करना हंै। उन्होंने कहा कि अगले सत्र से हम पांच नए पाठ्यक्रम को भी प्रारंभ करेंगंे जिसके लिए शासन से भी स्वीकृति मिल चुकी है।
कार्यक्रम के अंत में कुलपति जी ने मुख्य अतिथि गोपाल जी व्यास, विशिष्ट अतिथि ओ.पी. अग्रवाल एवं श्रीमती प्रियंका पांडे को साल श्रीफल के द्वारा सम्मानित किया। तदुपरांत डाॅ. किरण श्रीवास्तव और डाॅ. ब्रम्हेश श्रीवास्तव द्वारा लिखित दो पुस्तकों का विमोचन किया गया। इस अवसर पर सरगुजा वन विभाग के 15 अधिकारियों एवं कर्मचारियों के अतिरिक्त विश्वविद्यालय के समन नारायण उपाध्याय, डाॅ. आशीष बंजारा, मामडीकर राव, विजय गिरी, श्रीमती डिम्पल सिन्हा को सम्मानित किया गया। कार्यक्रम में मां वीणावांदिनी की वंदना डाॅ. राजकुमार उपाध्याय ने की। कार्यक्रम का संचालन डाॅ. अनिल सिन्हा ने किया और धन्यवाद ज्ञापन आर.के. चैहान ने किया।

इस अवसर पर डाॅ. बी.पी. तिवारी, नागेन्द्र तिवारी, ठाकुर राम यादव जी, एम.डी. लहरे, जाॅन तिग्गा, डाॅ. सचिन गजभिये, डाॅ. नेहा शर्मा, आनंद कुमार, खेमकरण अहिरवार, हरिशंकर प्रसाद तोण्डे, डाॅ. धीरज कुमार यादव, असीम केरकेट्टा, जयस्तु दत्ता, श्रीमती शोभना सिंह, डी.पी.एस. तिवारी, वजीर आलम, पी.डी. वर्मा, ए.एन. विश्वकर्मा आदि विश्वविद्यालय शिक्षण विभाग के समस्त शिक्षक और विश्वविद्यालय के प्रशासनिक अधिकारी एवं कर्मचारी उपस्थित रहे। प्रातः काल अभिषेक मिश्रा पुरोहित के द्वारा विश्वविद्यालय प्रांगण में वास्तुपूजन एवं हवन यज्ञ का कार्यक्रम संपन्न कराया गया था। इसकी सूचना विश्वविद्यालय के जनसम्पर्क अधिकारी डाॅ. राजकुमार उपाध्याय ने दी।

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