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फिक्की ने की मांग, सरकारी बैंकों का हो निजीकरण

नई दिल्लीः उद्योग संगठन भारतीय वाणिज्य एवं उद्योग महासंघ (फिक्की) ने पंजाब नेशनल बैंक (पीएनबी) में हुए करीब 11400 करोड़ रुपए के घोटाले के बीच आज सरकारी बैंकों के निजीकरण किए जाने की आवश्यकता बताते हुए कहा कि पिछले 11 वर्ष से बैंकों का पुनर्पूंजीकरण किया जा रहा है, लेकिन उसका प्रभाव सीमित रहा है।

उद्योग संगठन एसोचैम के सरकारी बैंकों के निजीकरण किए जाने की मांग के बाद फिक्की ने भी यहां जारी बयान में इसी तरह की आवश्यकता बताते हुए कहा कि भारत को सामाजिक-आर्थिक विकास के लिए टिकाऊ उच्च विकास की दरकार है जो एक मजबूत वित्तीय तंत्र के बैगर संभव नहीं है। उसने कहा कि भारतीय बैंकिंग तंत्र में सरकारी बैंकों की हिस्सदारी करीब 70 फीसदी है। जोखिम में फंसी संपत्तियों में बढोतरी होने से उन पर दबाव बढ़ा है। सरकार पिछले 11 वर्ष में पुनर्पूंजीकरण के तहत 2.6 लाख करोड़ रुपए का निवेश कर चुकी है, लेकिन सरकारी बैंकों की वित्तीय स्थिति पर इसका सीमित असर हुआ है।

फिक्की का मानना है कि सरकारी बैंकों का पुनर्पूंजीकरण ही इसका एक मात्र स्थायी समाधान नहीं है। तब तक यह प्रभावी नहीं होगा जब तक कि गवर्नेंस, उत्पादकता, जोखिम प्रबंधन, दक्ष श्रमिक, ग्राहक सेवा आदि से जुड़े मुद्दों का समाधान नहीं किया जाता। उसने कहा कि इन बैंकों के कमजोर प्रदर्शन के मद्देनजर सरकार को इनका निजीकरण करने पर विचार करना चाहिये। इससे सरकारी राजस्व बचेगा और जो राशि बचेगी उसका विकासात्मक कार्यक्रमों में उपयोग किया जा सकेगा। उसका कहना है कि बैंकिंग क्षेत्र की समय की मांग के मद्देनजर सरकार को फिक्की के सुझाव पर विचार करना चाहिए।

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