छत्तीसगढ़

फाइट अगेंस्ट इंजस्टिस ने गांव में बच्चों की आधुनिक शिक्षा के लिए शुरू किया आधुनिक पाठशाला

आजादी के 69 साल बाद भी देश के कई गांव में साक्षारता का अभाव नजर आता है, कुछ लोग इसे भगवान की मर्जी बताते हैं, कुछ सरकारी अनदेखी तो कुछ उनकी किस्मत पर ठीकरा फोड़ देते हैं

ब्यूरो चीफ : विपुल मिश्रा

देश की एक बड़ी आबादी गाँव में निवास करती है। वो हमेशा अभाव में होती है। उसकी बुनियादी जरूरतें तक न पूरे होने वाले ख्वाबों सरीखी होती हैं।

आजादी के 69 साल बाद भी देश के कई गांव में साक्षारता का अभाव नजर आता है, कुछ लोग इसे भगवान की मर्जी बताते हैं, कुछ सरकारी अनदेखी तो कुछ उनकी किस्मत पर ठीकरा फोड़ देते हैं। लेकिन एक तर्क संगत वजह भी है, और वो है ‘अशिक्षा’।

बच्चो को कम्प्यूटर शिक्षा और कोडिंग

बिलासपुर की एक गैर सरकारी संस्था फ़ाइट अगेन्स्ट इंजस्टिस खास ढंग से आगे आई है। इसमें संस्था के सभी सदस्य गांव में निवास कर रहे बच्चो को कम्प्यूटर शिक्षा और कोडिंग, पर्सनेलिटी डेवलपमेंट आदि जानकारी बच्चो तक पहुंचाई जा रही है संस्था के प्रयास इतने जबरदस्त हैं कि बच्चे पढ़ने के लिए खिंचे चले आते हैं।ये संस्था सामाजिक व शिक्षा के क्षेत्र में सराहनीय कार्य कर रही हैं। संस्था शिक्षा तुहर दुवार के जरिए कोरोना वैश्विक महामारी के बीच मे भी बच्चों की जिंदगी में शिक्षा की अलख जगा रही है।

इसी तर्ज पर आज ग्राम पंचायत पाण्ड के बच्चों को आधुनिक पाठशाला के तहत आधुनिकता से रूबरू कराया गया जिसम
बच्चों के अलावा उनके माता-पिता को भी जागरूक करने एक मुहिम शुरू की गई

एनजीओ ‘फाइट अगेन्स्ट इंजस्टिस फाउंडेशन

एनजीओ ‘फाइट अगेन्स्ट इंजस्टिस फाउंडेशन’ ने ‘आधुनिक पाठशाला’ व ‘पढ़ाई तुहार दुवार’ के माध्यम से समाज के बेहद गरीब और वंचित बच्चों को शिक्षित करने का बीणा उठाया। हाल ही में एक प्रभावशाली तरीके ने बिलासपुर शहर तथा आसपास के गाँव के बच्चों का ध्यान पढ़ाई की ओर खींचने में कामयाबी पाई।

शिक्षा की ओर इस सकारात्मक पहल में पाण्ड गांव की सरपंच सत्यवती भोलाराम रत्नाकर का पूर्ण सहयोग रहा। इस पहल से वे बच्चे भी प्रेरित हो रहे हैं जिन्होंने कभी पट्टी-बस्ता हाथों से नहीं उठाया और स्कूल के दरवाजे पर दस्तक नहीं दी। उनके मां-बाप भी चाहते हैं कि उनके बच्चे साक्षर हो।

संस्था प्रमुख शाहरुख अली बताते हैं कि

संस्था प्रमुख शाहरुख अली बताते हैं कि उनकी संस्था के प्रयास महज गाँव तक ही सीमित नहीं हैं। वे बिलासपुर में उन बच्चों को भी शिक्षित करने के प्रयास में लगे हैं जो हालातों के चलते मजदूर हो गए हैं और सैकड़ों कंस्ट्रक्शन साइटों में काम कर रहे हैं। शाहरुख ये भी बताते हैं कि बच्चों को शिक्षित करने के लिए ये भी जरूरी है कि उनके माता-पिता को भी शिक्षित किया जाए। और ये तभी संभव है जब हर जागरुक इंसान समाज के प्रति अपनी जिम्मेदारी समझे और आगे आए।

फाइट अगेंस्ट इंजस्टिस का ये कहना है कि उनकी संस्था ने साक्षरता की इस मुहिम में सभी लोगों के जुड़ने का आह्वान किया है। कॉलेज स्टूडेंट भी अपना योगदान दे सकते हैं। ज्यादा से ज्यादा जागरुक लोग इस मुहिम से जुड़ेंगे तो सफलता निश्चित ही मिलेगी।

बिलासपुर में इस मुहिम में स्वाति सूर्यवंशी , सुषमा चंद्राकर , रमीज अली , मोहम्मद नजीम , वीर चंद्राकर , सोनू मेहरोलिय , व पुरी टीम कार्यरत हैं। फाइट अगेन्स्ट इंजस्टिस के प्रयासों से सीख लेकर अन्य एनजीओ भी साथ आ रहे हैं और मिलकर शुभ कार्य को आगे बढ़ा रहे हैं।

आप भी अगर वंचित बच्चों को शिक्षित करने की इस मुहिम से जुड़ना चाहते हैं तो हमें इंस्टाग्राम में फालो करे Fight_against_injustice_

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