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film review: करण को डायलॉग डिलिवरी के लिए करना पड़ेगा थोड़ा और मेहनत

फिल्म 'पल पल दिल के पास आज सिनेमाघरो में रिलीज

नई दिल्ली: आज शुक्रवार को सांसद सदस्य और बॉलीवुड दिग्गज अभिनेता सनी देओल के बेटे करण देओल का पहला फिल्म पल पल दिल के पास सिनेमाघरों में शुरू हो गया है. इस फिल्म में करण के साथ सहर बांबा भी नजर आएँगी.

एडवेंचर और एक्शन का भी तगड़ा डोज

फिल्म में करण देओल के साथ वह लीड एक्ट्रेस की भूमिका में हैं. इस फिल्म में रोमांस के साथ ही एडवेंचर और एक्शन का भी तगड़ा डोज शामिल किया गया है. साथ ही फिल्म में आपको उत्तर भारत में हिमालय के खूबसूरत नजारे भी देखने को मिलेंगे.

फिल्म में सेहगल नाम के एक युवक के किरादर में करण

अगर देखा जाए, तो यह एक लव स्टोरी कहानी. फिल्म में करण सेहगल नाम के एक युवक के किरदार में आपको करण देओल नजर आएंगे, जो एक ट्रेकिंग कंपनी के मालिक हैं और दूसरी तरफ सहर सेठी नाम की एक लड़की की भूमिका में आपको सहर बांबा दिखाई देंगी, जो एक मशहूर वीडियो ब्लॉगर हैं.

अपने एक नए ब्लॉग की तैयारी में सहर की मुलाकात करण से होती है. सहर, करण के साथ ट्रेकिंग पर निकलती हैं, जहां दोनों के बीच प्यार हो जाता है. ट्रेकिंग के दौरान दोनों काफी वक्त साथ में गुजारते हैं. इस बीच दोनों बीच काफी नोंक झोंक होती है, लेकिन लड़ते-लड़ते दोनों को एक दूसरे से प्यार हो जाता है.

अब इन दोनों की लव स्टोरी किस तरह पूरी होगी और होगी भी या नहीं… इसके लिए आपको खुद थिएटर जाकर पूरी फिल्म देखनी होगी. चूंकि दोनों की यह पहली फिल्म थी, इसलिए इनके अभिनय के बारे में बात करना तो बनता है.

करण की अभिनय की बात की जाए, तो वह पर्दे पर काफी नेचुरल लगते हैं, लेकिन उन्हें डायलॉग डिलिवरी के लिए थोड़ा और मेहनत करना पड़ेगा. वैसे इनकी एक्टिंग आपको ठीक ठाक नजर आएगी. वहीं, बात करें सहर की तो यह पर्दे पर काफी कॉन्फिडेंट नजर आती हैं.

एक्टिंग सहर की काफी असरदार रही

इमोशनल सीन्स को सहर ने बखूबी निभाया है, लेकिन कॉमेडी सीन्स के लिए इन्हें काफी मेहनत करनी पड़ेगी. वैसे एक्टिंग सहर की काफी असरदार रही है. कुल मिलाकर दोनों की एक्टिंग ठीक ठीक कही जा सकती है. चूंकि यह दोनों की पहली फिल्म थी, इसलिए दर्शक इस जोड़ी को काफी पसंद करने वाली है.

फिल्म के डायरेक्शन के कमान खुद करण के पापा सनी देओल ने संभाला है, इसलिए आपको हिमाचल प्रदेश के कुछ बेहद खूबसूरत नजारे फिल्म में देखने को मिलते हैं जिन पर नजरें ठहर जाती हैं. सनी देओल ने अपने बेटे के लिए कमाल का डायरेक्शन किया है, जिसकी के लिए उनकी तारीफ करनी तो बनती है. कुल मिलाकर देखा जाए तो यह फिल्म एक बार तो देखी जा सकती है. फिल्म की रनिंग स्पीड भी अच्छी है, जो आपको बेर होने नहीं देती. साथ फिल्म का संगीत भी आपके दिल को जीतने के लिए काफी हैं.

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