प्राकृतिक तरीके से पाएं मिर्गी पर काबू

नई दिल्ली। मिर्गी रोग दिमाग में इलेक्ट्रिकल एक्टिविटी यानी विद्युत प्रवाह की गड़बड़ी के कारण होता है। यदि किसी व्यक्ति का मस्तिष्क ठीक ढंग से कार्य न कर पा रहा हो, तो व्यक्ति को मिर्गी का रोग हो सकता है। कई प्राकृतिक उपायों द्वारा इस पर काबू पाया जा सकता है।

मिर्गी न्यूरोलॉजिकल डिसॉर्डर के कारण होता है। मिर्गी का रोग व्यक्ति के द्वारा अत्यधिक नशीले पदार्थों का सेवन करने, मस्तिष्क में गहरी चोट लगने या मानसिक सदमा लगने के कारण भी हो सकता है। ये बीमारी मस्तिष्क के विकार के कारण होती है। मिर्गी का दौरा पड़ने पर शरीर अकड़ जाता है, जिसे अंग्रेजी में सीजर डिसॉर्डर भी कहते हैं।

व्याप्त हैं भ्रांतियां

अपोलो हॉस्पिटल के न्यूरोलॉजी के सीनियर कंसल्टेंट डॉ. मुकुल वर्मा कहते हैं कि इस बीमारी को लेकर लोगों के मन में कई गलत धारणाएं हैं जिस कारण इसका सही तरह से इलाज नहीं हो पाता। लोग मिर्गी के मरीज को पागल ही समझ लेते हैं। ग्रामीण इलाकों में तो लोग इस बीमारी को भूत-प्रेत का साया समझते हैं। सबसे जरूरी है इन भ्रांतियों को दूर करना।

खानपान पर हो नियंत्रण

रोगी की जीवनशैली में बदलाव करने से इस रोग पर काफी हद तक काबू पाया जा सकता है। एक शोध के अनुसार, मिर्गी के रोगी को ज्यादा फैट वाला और कम कार्बोहाइड्रेड वाला खाना लेना चाहिए। इससे सीजर पड़ने के अंतराल में कमी आती है। शांत और आरामदेह वातावरण में रहते हुए नियंत्रित भोजन व्यवस्था अपनाना बहुत जरूरी है। भोजन भर पेट लेने से बचना चाहिए। थोड़ा-थोड़ा भोजन कई बार ले सकते हैं। रोगी को सप्ताह में एक दिन सिर्फ फलों का आहार करना चाहिए। थोड़ा व्यायाम करना भी जीवनशैली का भाग होना चाहिए।

बहुपयोगी है तुलसी

तुलसी के पत्तों को पीसकर शरीर पर मलने से मिर्गी के रोगी को लाभ होता है। तुलसी की पत्तियों के साथ कपूर सुंघाने से मिर्गी के रोगी को होश आ जाता है। रोजाना तुलसी के 20 पत्ते चबाकर खाने से रोग की गंभीरता में गिरावट देखी जाती है।

असरकारी नीबू

मिर्गी की बीमारी से राहत पाने के लिए एक नीबू पर थोड़ा-सा हींग का पाउडर छिड़ककर इसे चूसें। नीबू में हींग पाउडर या गोरखमुंडी मिलाकर रोजाना चूसने से कुछ ही दिनों में मिर्गी के दौरे आने बंद हो जाएंगे।

इन उपायों को भी आजमाएं

अंगूर का रस प्रात:काल खाली पेट लेना चाहिए। यह उपचार करीब छह माह करने से सुखद परिणाम मिलते हैं।
एप्सम साल्ट (मैग्नीशियम सल्फेट) मिश्रित पानी से रोगी को स्नान करना चाहिए।
गीली मिट्टी को रोगी के पूरे शरीर पर लगाना अत्यंत लाभकारी उपचार है।

मिर्गी रोगी को 250 ग्राम बकरी के दूध में 50 ग्राम मेहंदी के पत्तों का रस मिलाकर दो सप्ताह तक सुबह के समय पीने से दौरे बंद हो जाते हैं।

पेठे का जूस नियमित पीने से ज्यादा लाभ होता है। रस में शक्कर और मुलहटी का पाउडर भी मिलाया जा सकता है।
गाय के दूध से बनाया हुआ मक्खन मिर्गी में फायदा पहुंचाता है। राई पीसकर चूर्ण बना लें। जब रोगी को दौरा पड़े, तो सुंघा दें, बेहोशी दूर हो जाएगी।सेब का जूस पीने से भी लाभ होता है।

पांच करोड़ से ज्यादा हैं शिकार

दुनिया भर में पांच करोड़ से ज्यादा लोग मिर्गी के शिकार हैं और यह समस्या लगातार बढ़ रही है। भारत समेत दुनिया के तमाम देशों में मिर्गी की बीमारी आम है।

प्रस्तुति : नीलम

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