जानिए क्यों डायबिटीज के दौरान स्तनपान कराना हैं फायदेमंद

शिशु के जन्म के बाद उसके लिए सबसे पहला और पौष्टिक आहार माना जाता है

शिशु के जन्म के बाद उसके लिए सबसे पहला और पौष्टिक आहार माना जाता है मां का दूध। स्तनपान कराने से जितना फायदा शिशु को होता है उतना ही मां को होता है।

लेकिन कई बार देखा जाता है कि कुछ महिलाएं डायबिटीज की शिकार होने के कारण वह स्तनपान कराना नुकसानदेह समझती है लेकिन उनका ऐसा सोचना बिल्कुल गलत है।

आज हम आपको बताएंगे डायबिटीज के दौरान किन परिस्थितियों में ब्रेस्ट फीडिंग कराना फायदेमंद है और कब नुकसानदेह है?

इन परिस्थितियों में होता है फायदा

डायबिटीज के दौरान महिला का स्तनपान कराना काफी फायदेंमद होता है। वह जब-जब ब्रेस्ट फीडिंग कराती हैं, तब-तब शरीर से 500 कैलोरी घटती है और वह महिला स्वस्थ रहती है।

जिन महिलाओं को पहले डायबिटीज था, उन्हें स्तनपान के दौरान ब्लड शुगर कंट्रोल करने के लिए कम इंसुलिन की जरूरत पड़ी।
एक सर्वे के अनुसार पता लगाया गया कि 2 महीने तक स्तनपान कराने से महिलाओं में डायबिटीज होने की संभावना 50 प्रतिशत कम होती है और 5 महीने तक स्तनपान कराने वाली मांएं डायबिटीज से काफी हद तक बचकर आगे निकल जाती है। इसके पीछे की वजह ब्रेस्ट फीडिंग के दौरान घटने वाले वजन की मात्रा को भी माना जाता है।

इन परिस्थितियों में है नुकासानदेह

जिन महिलाओं को टाइप-2 डायबिटीज हो, उनके लिए बच्चे को स्तनपान कराना नुकसान देह हो सकता है।

इस डायबिटीज में शरीर पर्याप्त मात्रा में इंसुलिन नहीं बनाता और साथ ही में इंसुलिन का विरोध भी करता है। इस कारण शरीर में शुगर लेवल बढ़ता है और यह कई बीमारियों का भी कारण बन सकता है।

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