प्रद्युम्न मर्डर केस: CBI के लिए बड़ी है चुनौती

नई दिल्ली: गुरुग्राम के रायन इंटरनैशनल स्कूल में सात साल के प्रद्युम्न ठाकुर की हत्या का मामला सीबीआई को सौंपा जा चुका है।

ऐसे में अब इस जघन्य अपराध की जांच कर हत्यारे तक पहुंचना एजेंसी की फ़रेंसिक स्किल्स का टेस्ट होगा।

फ़रेंसिक तथ्यों के विश्लेषण में सीबीआई को अपना कौशल दिखाना होगा। सेंट्रल फ़रेंसिक साइंस लैबरेटरी, सेंटर फॉर डीएनए फिंगरप्रिंटिंग ऐंड डायग्नोज्स्टिक और एम्स के डॉक्टर मिलकर घटनाओं के क्रम को समझने की कोशिश करेंगे, जिससे प्रद्युम्न की हत्या की गई।

यह भी पता लगाने की कोशिश की जाएगी कि हत्या में किस हथियार का इस्तेमाल किया गया और हत्या ठीक किस समय की गई।

सीबीआई यह भी पता लगाने की कोशिश करेगी कि क्या वास्तव में स्कूल बस का कंडक्टर अशोक कुमार ही हत्यारा है या कोई और।

अशोक को मुख्य संदिग्ध के तौर पर गुरुग्राम पुलिस ने गिरफ्तार किया है। बताया गया है कि उसने यौन शोषण की कोशिश के बाद चाकू से बच्चे की हत्या कर दी।

उसने अपना गुनाह कबूल भी कर लिया है। अब जांच के लिए सीबीआई लाईडिटेक्शन, नार्को-अनैलेसिस और साइको-अनैलेसिस जैसे सायंटिफिक टेस्ट का इस्तेमाल कर सकती है।

गौरतलब है कि दोबारा क्राइम सीन तैयार करने के लिए सीबीआई जानी जाती है। एजेंसी यह भी पता लगाने में सक्षम है कि पुलिस की जांच में कोई कमी तो नहीं रह गई, गवाहों के बयान में कोई विसंगतियां तो नहीं थी।

अगर ऐसा कुछ लगता है तो सीबीआई स्कूल प्रशासन, टीचर्स व अन्य से पूछताछ और जांच कर सकती है। मामले के तूल पकड़ने के बाद इस मामले की जांच सीबीआई को सौंपी गई है।

एजेंसी पहले भी इन्हीं तरीकों से कई बड़े मामलों की जांच कर चुकी है, जिसकी वजह से आरुषि तलवार मर्डर केस में कई अहम जानकारियं मिलीं।

मुंबई का शीना बोरा हत्याकांड और राजस्थान के चर्चित भंवरी देवी हत्याकांड में भी सीबीआई ने सायंटिफिक टेस्ट का काफी इस्तेमाल किया था।

2011 में भंवरी देवी की हत्या के मामले में सीबीआई ने घने जंगलों में शव तक पहुंचने के लिए ड्रोन का इस्तेमाल किया था।

एजेंसी हर साल भ्रष्टाचार और जघन्य अपराध के 66 फीसदी मामलों में सजा दिलाने में कामयाब रहती है।

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