IAS राजेश सुकुमार टोप्पो के खिलाफ EOW ने दर्ज की FIR

इन कंपनियों को भी बनाया आरोपी

रायपुर। छत्तीसगढ़ के पूर्व जनसंपर्क प्रमुख 2005 बैच के आईएएस अधिकारी राजेश सुकुमार टोप्पो भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के खिलाफ 1988 की धारा 7(सी), 13(1) (ए) और भादवि की धारा 120 बी के तहत दो अलग अलग मामले दर्ज किए है।
IAS अधिकारी राजेश सुकुमार टोप्पो के अलावा दो अन्य कंपनियों पर भी एफ आई आर दर्ज किए हैं। ईओडब्लू के प्रमुख जीपी सिंह के मुताबिक यह रिपोर्ट संवाद के प्रमुख उमेश मिश्रा, पंकज गुप्ता, हीरालाल देवांगन, जे.एल. दरियो की कमेटी की ओर से प्रारंभिक जांच के बाद सौंपी गई रिपोर्ट और नए सिरे की गई तहकीकात के आधार पर दर्ज की गई है। उन्होंने बताया कि अभी कई खुलासे बाकी है। संभव है आगे कुछ और मामलों में एफआईआर दर्ज हो सकती है।

इधर सामाजिक कार्यकर्ता उचित शर्मा उनकी करतूतों का भांडा फोड़ने में लगे हुए थे। सूचना के अधिकार के तहत हासिल की गई जानकारियों के बाद उचित शर्मा यह प्रमाणित करने में सफल हो गए कि जनसंपर्क और संवाद के प्रमुख रहने के दौरान टोप्पो ने कई करोड़ रुपए की वित्तीय गड़बड़ियों को अंजाम दिया है।

बताते हैं कि टोप्पो ने पिछले दिनों राज्य के कई कद्दावर अफसरों और नेताओं से अपने बचाव के लिए मेल-मुलाकात की थीं। प्रशानिक हल्कों में यह चर्चा थीं कि वे किसी न किसी तरह की जोड़-जुगाड़ से बच निकलेंगे, लेकिन ऐसा नहीं हो पाया। शुक्रवार को उनके साथ-साथ क्यूब मीडिया एंड ब्रांडिग लिमिटेड, मूविंग फिक्सल सहित अन्य कुछ कंपनियों के प्रमुखों को आरोपी बनाया गया है।

48 फर्म जांच के दायरे में

नई सरकार बनने के बाद जनसंपर्क और संवाद के अधिकारियों ने 21 निविदा प्रक्रियाओं के तहत पंजीबद्ध 48 फर्मों और एजेंसियों को जांच के दायरे में रखा था। जिन कंपनियों को जांच के दायरे में रखा गया। उनमें मुंबई की बैटर कम्युनिकेशन, एड फैक्टर, टच वुड, 77 इंटरटेनमेंट, एक्सेस माई इंडिया, दिल्ली की वीडियो वॉल, करात इंटरटेनमेंट, ग्रीन कम्युनिकेशन, सिल्वर टच, यूएनडीपी, गुजरात की वॉर रुम, मूविंग फिक्सल, रायपुर की ब्रांड वन, व्यापक इंटरप्राइजेस, क्यूबस मीडिया लिमिटेड, कंसोल इंडिया, भिलाई की कंपनी क्राफ्ट, आसरा शामिल थीं।

इसके अलावा आलोक नाम के एक प्रोफेसर ने भी संवाद में अपनी दुकान खोल रखी थी। जबकि क्यूब मीडिया के सीईओ डोढ़ी का कारोबार भी संवाद से ही संचालित हो रहा था। हैरत की बात यह है कि भारतीय प्रशासनिक सेवा के एक अफसर की पत्नी की जितनी सक्रियता मुख्यमंत्री निवास में बनी हुई थीं उससे कहीं ज्यादा वह संवाद में सक्रिय थीं।

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