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मथुरा के एक मंदिर में नमाज़ पढ़ने पर एफ़आईआर दर्ज, क्या है पूरा मामला?

फ़ैसल ख़ान ने ख़ुद को दोनों धर्मों में समन्वय रखने वाला बताया था.

मथुरा: उत्तर प्रदेश के मथुरा के नंदबाबा मंदिर में नमाज़ पढ़ने के मामले में चार लोगों के ख़िलाफ़ मुक़दमा दर्ज किया गया है. इनमें से दो लोगों ने 29 अक्तूबर को मंदिर परिसर में नमाज़ पढ़ी थी.

मथुरा के बरसाना थाने में आईपीसी की धारा 153ए, 295 और 505 के तहत ये मुक़दमा दर्ज किया गया है.ये धाराएँ समुदायों के बीच वैमनस्य फैलाने, धर्मस्थल का अपमान करने और किसी धर्म के ख़िलाफ़ आपराधिक गतिविधि से जुड़ी हुई हैं.मथुरा के पुलिस अधीक्षक (देहात) श्रीश चंद के मुताबिक़ मंदिर के सेवादारों की शिकायत के आधार पर मुक़दमा दर्ज किया गया है.

ये मुक़दमा फ़ैसल ख़ान, चांद मोहम्मद, नीलेश गुप्ता और आलोक रतन नाम के लोगों के ख़िलाफ़ किया गया है जो दिल्ली में रहते हैं और ‘ख़ुदाई ख़िदमतगार’ नाम की सामाजिक संस्था के साथ जुड़े हुए हैं.ख़ुदाई ख़िदमतगार दिल्ली की एक ग़ैर-सरकारी संस्था है जो शांति, भाईचारा और सद्भावना के लिए काम करने का दावा करती है.

साल 2011 में फ़ैसल ख़ान ने दोबारा इस संगठन को शुरू किया था.

मथुरा के एसएसपी गौरव ग्रोवर ने बीबीसी को बताया है कि फ़ैसल ख़ान को पूछताछ के लिए हिरासत में लिया गया है.

मंदिर के एक सेवादार सुशील गोस्वामी ने स्थानीय पत्रकार सुरेश सैनी से कहा, “मंदिर में नमाज़ पढ़ने वाले लोगों ने उस दिन तैनात सेवादार को अपने आप को दोनों धर्मों में आस्था रखने वाला बताया था और दर्शन करने की अनुमति मांगी थी.

फ़ैसल ख़ान ने ख़ुद को दोनों धर्मों में समन्वय रखने वाला बताया था.दर्शन करने के बाद उन्होंने गेट नंबर दो के पास ख़ाली जगह में नमाज़ की मुद्रा में फ़ोटो खिंचाए. हम ये नहीं कह सकते कि उन्होंने वहां नमाज़ पढ़ी या फिर किसी साज़िश के तहत फ़ोटो खिंचाए.”

गोस्वामी ने कहा, “सोशल मीडिया पर तस्वीरें वायरल होने के बाद हमें घटना के बारे में पता चला. इसे लेकर गोस्वामियों में आक्रोश है. हम पूरी घटना की जाँच की माँग कर रहे हैं.”

फ़ैसल ख़ान ने बीबीसी से बात करते हुए कहा, “हम 84 कोस की सद्भावना यात्रा कर रहे थे. यात्रा के समापन के बाद हम नंदबाबा के मंदिर में पहुँचे थे. यहां हमने पुजारियों की मंज़ूरी के बाद नमाज़ पढ़ी थी. अब पता चला है कि हमारे ख़िलाफ़ मुक़दमा दर्ज हुआ है. उस समय पुजारी हमसे प्रसन्न थे, वो सीधे-साधे आदमी हैं, ज़रूर किसी दबाव में होंगे.”

फ़ैसल के मुताबिक़ अभी पुलिस ने उनसे पूछताछ नहीं की है और उन्होंने अग्रिम ज़मानत हासिल करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है.

फ़ैसल ने कहा कि उनकी “यात्रा का मक़सद सभी धर्मों के बीच सद्भावना और भाइचारे को बढ़ावा देना था. उनका मक़सद किसी की भावनाएं आहत करना नहीं हैं.”

वहीं मंदिर में नमाज़ पढ़े जाने की तस्वीरें सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद कई लोगों ने इसका विरोध किया है.

स्थानीय पत्रकार सुरैश सैनीने बताया कि मंदिर परिसर को सोमवार को गंगाजल से धोया गया, हवन और यज्ञ भी किया गया है.

मथुरा के हिंदू समाज से जुड़े कुछ लोगों ने घटना की जाँच की माँग की है.

भगवताचार्य संजीव कृष्ण ठाकुर ने कहा, “मंदिर परिसर में नमाज़ पढ़ने की घटना स्तब्ध करने वाली है. प्रशासन को जाँच करनी चाहिए कि क्या इसके पीछे माहौल ख़राब करने का कोई षडयंत्र तो नहीं हैं. इस घटना के बाद शक पैदा हो रहा है. हम सरकार से इसकी पूरी जाँच करके दोषी पाए जाने पर दंडित करने की अपील करते हैं.”

इन आरोपों पर फ़ैसल का कहना है कि वो किसी भी जाँच के लिए तैयार हैं, उनका इरादा किसी की भावनाएं आहत करना नहीं था. वे ज़ोर देकर कहते हैं, “हमने मंदिर के पुजारी के आग्रह पर ही नमाज़ पढ़ी थी. हमारी वहां उनसे सौहार्दपूर्ण वार्ता हुई थी.”

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