छत्तीसगढ़

छत्तीसगढ़ में अधिक आवाज वाले पटाखों के उत्पादन-बिक्री पर रोक

छत्तीसगढ़ में भी दिल्ली व एनसीआर के बाद तेज आवाज वाले पटाखों के उत्पादन और बिक्री

रायपुर: छत्तीसगढ़ में भी दिल्ली व एनसीआर के बाद तेज आवाज वाले पटाखों के उत्पादन और बिक्री पर रोक लगा दी गई है। इस संबंध में सोमवार को आदेश जारी किए गए हैं। आदेश में कहा गया है कि, संवेदनशील क्षेत्रों के सौ मीटर की दूरी तक पटाखे नहीं फोड़े जा सकेंगे। खुले में कचरा जलाने वालों पर भी सख्ती से कार्रवाई की जाएगी।

छत्तीसगढ़ पर्यावरण संरक्षण मंडल के अध्यक्ष अमन सिंह ने सोमवार को विभाग के आला अधिकारियों की अहम बैठक ली। बैठक खत्म होने के बाद सभी जिलों के कमिश्नरों और कलेक्टरों को परिपत्र जारी कर दिया गया। परिपत्र में दीपावली को ध्यान में रखकर अधिक आवाज वाले पटाखों पर अंकुश लगाने और ध्वनि प्रदूषण को रोकने के लिए प्रभावी कदम उठाने के भी निर्देश दिए गए हैं। बैठक में पर्यावरण विभाग के सचिव संजय शुक्ला, कलेक्टर ओ.पी. चौधरी, नगर निगम आयुक्त रजत बंसल, छत्तीसगढ़ पर्यावरण संरक्षण मंडल के सचिव देवेन्द्र सिंह और अरूण प्रसाद उपस्थित थे।

परिपत्र में कहा गया है कि, दीपावली के अवसर पर बड़ी मात्रा में आतिशबाजियां की जाती है और पटाखे फोड़े जाते हैं, जिनसे हवा और ध्वनि प्रदूषण की गंभीर समस्या उत्पन्न होती है। इसे ध्यान में रखकर संबंधित सभी विभाग यह सुनिश्चित करें कि, पटाखों से होने वाले प्रदूषण की समस्या के निराकरण के लिए सर्वोच्च न्यायालय के निर्देशों का अनिवार्य रुप से पालन हो।
अमन सिंह ने कमिश्नरों और कलेक्टरों से कहा है कि, रात 10 बजे से सुबह 6 बजे तक पटाखे न फोड़े जाएं। अतिसंवेदनशील क्षेत्रों जैसे अस्पताल, शिक्षण संस्थायें, अदालत, धार्मिक संस्थायें आदि के कम से कम 100 मीटर दूरी तक पटाखें न फोड़े जाएं। उन्होंने बैठक में चार मीटर की दूरी तक 125 डेसीबल या 145 डेसीबल से अधिक शोर करने वाले पटाखे की बिक्री और इस्तेमाल को प्रतिबंधित करने के भी निर्देश दिए।

अमन सिंह ने परिपत्र के जरिए अधिकारियों से कहा है कि, वे विद्यार्थियों को ध्वनि प्रदूषण और वायु प्रदूषण के बारे में जानकारी दें। साथ ही पटाखों के दुष्प्रभावों के बारे में भी उनको बताया जाए और जनजागरण अभियान में स्कूली बच्चों को भी शामिल किया जाए। राज्य के समस्त संभागीय कमिश्नरों और जिला कलेक्टरों से उन्होंने कहा है कि खेतों में फसल कटाई के बाद पौधों के सूखे रह गए अवशेषों को जलाने पर भी रोक होनी चाहिए।

इस संबंध में छत्तीसगढ़ सरकार के पर्यावरण विभाग और नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल के आदेशों का पालन अनिवार्य रूप से किया जाए। उन्होंने इसके लिए कृषि विभाग और अन्य संबंधित विभागों के सहयोग से किसानों के बीच व्यापक जन जागरण अभियान की जरूरत पर बल दिया।

प्रमुख सचिव अमन सिंह ने रायपुर शहर की वायु गुणवत्ता के संबंध में कलेक्टर को सघन अभियान चलाने और निर्माणाधीन भवनों में ग्रीन नेट अथवा अस्थायी विंड ब्रेकिंग वॉल लगवाने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि, जिन भवन निर्माताओं द्वारा निर्देशों का पालन नही किया जा रहा है, उनके विरूद्ध नियमों के तहत कड़ी कार्रवाई की जाए।
रायपुर कलेक्टर ओमप्रकाश चौधरी ने शहरी क्षेत्रों में ठोस कचरे को खुले में जलाने से रोकने के लिए भी कड़ी कार्रवाई करने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने कहा कि, 03 माह के भीतर इस संबंध में विभाग को रिपोर्ट दी जाए।

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