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प्रथम श्रेणी के मजिस्ट्रेट के वेतन में होगी लगभग तीन गुना बढ़ोतरी

नई दिल्ली: ऑल इंडिया जजेज एसोसिएशन मई 2017 के उच्चतम न्यायालय के आदेश पर गठित आयोग ने हाल ही में सुप्रीम कोर्ट रजिस्ट्री को पांच वॉल्यूम वाली रिपोर्ट सौंपी है, जिसमें उसने देशभर के न्यायिक अधिकारियों के वेतन, पेंशन और भत्तों में वृद्धि संबंधी सिफारिशें की हैं.रिपोर्ट के अनुसार जूनियर सिविल जज यानी प्रथम श्रेणी के मजिस्ट्रेट के वेतन में लगभग तीन गुना बढ़ोतरी होगी.

आयोग की अध्यक्षता उच्चतम न्यायालय के पूर्व न्यायाधीश पी वेंकटरमा रेड्डी कर रहे हैं और केरल उच्च न्यायालय के पूर्व न्यायाधीश एवं वरिष्ठ अधिवक्ता आर बसंत इसके सदस्य तथा दिल्ली उच्चतर न्यायिक सेवा के जिला जज विनय कुमार गुप्ता इसके सदस्य सचिव हैं. गुप्ता की ओर से गुरुवार को जारी एक बयान में इस बाबत जानकारी दी गई है.

आयोग की अंतिम रिपोर्ट में की गई सिफारिशों के अनुरूप जूनियर सिविल जज/प्रथम श्रेणी मजिस्ट्रेट का शुरुआती वेतन 27 हजार 700 रुपये से करीब तीन गुना बढ़कर 77 हजार 840 रुपये हो जाएगा.

रिपोर्ट के अनुसार, जिला जज का वेतन एक लाख 44 हजार 840 रुपये से शुरू होता है और उसका अधिकतम वेतन दो लाख 24 हजार 100 रुपये होगा. सेलेक्शन ग्रेड और सुपर टाइम स्केल (एसटीएस) के जिला जजों के वेतन में क्रमश: 10 प्रतिशत और पांच प्रतिशत की बढ़ोतरी होगी.

न्यायिक अधिकारियों के लिए पेंशन की राशि भी प्रस्तावित संशोधित वेतनमान के आधार पर सेवानिवृत्ति के समय प्राप्त वेतन का 50 प्रतिशत होगी, जबकि फैमिली पेंशन अंतिम वेतन की 30 फीसदी होगी.

जिला जज नोडल ऑफिसर नियुक्त

आयोग की रिपोर्ट में कहा गया है कि पेंशनरों और फैमिली पेंशनरों की सहायता के लिए जिला जज नोडल ऑफिसर नियुक्त करेंगे. इन न्यायिक अधिकारियों के विभिन्न भत्तों में भी पर्याप्त बढ़ोतरी की गयी है और कुछ नये भत्ते यथा- बच्चों की शिक्षा संबंधी भत्ते, घरेलू अर्दली भत्ते, परिवहन भत्ते भी जोड़े गये हैं.

गौरतलब है कि 16 नवम्बर 2017 को विधि एवं न्याय मंत्रालय की ओर से जारी अधिसूचना के जरिये गठित आयोग ने 2018 में एक अंतरिम रिपोर्ट भी न्यायालय को सौंपी थी. अब इसने अंतिम रिपोर्ट सौंपी है.

आयोग की सिफारिशों के अनुरूप संशोधित वेतन एवं पेंशन एक जनवरी 2016 से प्रभावी होंगे, जबकि बकाये (एरियर) का भुगतान अंतरिम राहत को समायोजित करने के बाद कैलेंडर वर्ष 2020 में कर दिया जायेगा.

गौरतलब है कि इन सिफारिशों पर अमल तभी हो सकेगा जब उच्चतम न्यायालय इस मामले में सभी पक्षों को सुनने के बाद अपना निर्णय देगा.

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