रतनपुर में में राइट टू रिकॉल का पहला चुनाव; 578 वोट से नगर पालिका में बच गई कांग्रेस की आशा

अंकित मिंज

बिलासपुर। रतनपुर नगर पालिका परिषद अध्यक्ष के राइट टू रिकॉल चुनाव में कांग्रेस और भाजपा के 13 पार्षदों की एकजुटता भी वर्तमान अध्यक्ष आशा सूर्यवंशी को हटा नहीं सकी। 15 वार्डों के हुए चुनाव में शुरूआती दौर में पिछड़ने के बाद आशा ने लगातार बढ़त बनाते हुए 578 मतों से जीत हासिल की।

25 में से सात मतदान केंद्र पर मिले एकतरफा वोट गुरुवार को रतनपुर नगर पालिका परिषद अध्यक्ष के चुनाव में नतीजे जानने के लिए नूतन हाईस्कूल के सामने लोगों की भीड़ लगी रही। सुबह 9 बजे शुरू हुई मतगणना के पहले ही यह भीड़ काउंटिंग स्थल के सामने जुटने लगी थी।

छह राउंड तक कुल 25 मतदान केंद्रों के लिए हुई मतगणना 10ः15 बजे समाप्त हो गई। सड़क के एक ओर खाली कुर्सी के समर्थकों की भीड़ थी और दूसरी ओर भरी कुर्सी के समर्थकों की भीड़ थी।

तीन राउंड में 300 वोटों से पीछे हुई थी नगर पालिका परिषद अध्यक्ष

शुरूआती तीन राउंड तक नगर पालिका परिषद अध्यक्ष 300 वोटों से पिछड़ रही थी लेकिन इसके बाद सात मतदान केंद्रों में पड़े एकतरफा वोट से उनकी बढ़त आखिरी तक बरकरार रही।

उतार चढ़ाव के दौरान दोनों पक्षों का उत्साह भी नजर आया पर नतीजे आए तो आशा को हटाने की इच्छा रखने वालों के चेहरे उदास हो गए। नतीजे आते ही अगले 11 महीने के लिए आशा के अध्यक्ष बने रहना तय हो गया।

हाईकोर्ट के निर्देश पर हुए चुनाव

16 माह तक अध्यक्ष को वापस बुलाने के लिए रतनपुर से लेकर रायपुर और हाईकोर्ट तक के चक्कर लगे। हाईकोर्ट के आदेश के परिपालन में ही आखिर चुनाव आयोग ने निर्देश दिए और चुनाव हुए तो अध्यक्ष आशा सूर्यवंशी ने जीत दर्ज की।

रतनपुर की जनता ने भरी कुर्सी और खाली कुर्सी के लिए वोट डालते समय इस बात का भी ध्यान रखा कि प्रदेश में कांग्रेस की सरकार है। बता दें कि 20 नवंबर को विधानसभा चुनाव में रतनपुर नगर से कांग्रेस प्रत्याशी को भाजपा प्रत्याशी से कम वोट मिले थे।

एक माह में पलट गए वोटर

रतनपुर नगर पालिका परिषद में राइट टू रिकॉल के तहत हुए चुनाव में भले ही कांग्रेस समर्थित अध्यक्ष आशा सूर्यवंशी को जीत मिली हो लेकिन विधानसभा चुनाव में कांग्रेस प्रत्याशी भाजपा उम्मीदवार से 511 वोटों से पीछे थे।

कांग्रेस समर्थित अध्यक्ष को पद से हटाने के लिए जमकर राजनीति हुई और इसकी आंच बिलासपुर तक में पहुंची। आशा ने तो तत्कालीन मंत्री अमर अग्रवाल तक से गुहार लगाई लेकिन उनकी कुर्सी पर से खतरा नहीं टला। राइट टू रिकॉल के मतदान में आशा 578 वोटों से अपनी कुर्सी बचाने सफल रही। वहां 17421 मतदाताओं से 9072 ने वोट डाले थे।

यह मेरी नहीं जनता की जीत

यह मेरी नहीं जनता की जीत है। जिस तरह जनता ने मुझ पर दोबारा विश्वास जताया है उसे बनाए रखने की पूरी कोशिश करूंगी। सभी के सहयोग से मुझे यह जीत हासिल हुई है।

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