मध्यप्रदेश

MP उपचुनाव में भाजपा की जीत के पांच शिल्पकार! किसी की दांव पर लगी थी साख

किसी को था लोकप्रियता खत्म होने का डर

भोपाल। मध्य प्रदेश में उप चुनाव में मिली जीत के शिल्पकार बीजेपी के पंचरत्न यानी मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान, ज्योतिरादित्य सिंधिया, केंद्रीय मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर, प्रदेश के गृह मंत्री नरोत्तम मिश्रा और भाजपा प्रदेश अध्यक्ष वीडी शर्मा रहे। मध्य प्रदेश में अब तक सीएम शिवराज ही चुनाव का केंद्र बिंदु हुआ करते थे पर इस बार चुनाव में जीत के चेहरे पांच रहे !

देश के इतिहास में पहली मर्तबा 28 विधानसभा क्षेत्रों में उपचुनाव मध्य प्रदेश में हुए । ये साधारण उपचुनाव नहीं थे। इस उपचुनाव के परिणाम पर सरकार का भविष्य तय होना था। इसलिए जहां बीजेपी ने अपने पंचरत्नों को पूरे चुनाव की जिम्मेदारी सौंप दी थी, वहीं कांग्रेस की ओर से प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष व पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ मोर्चा लड़ाते रहे।

बीजेपी ने अपने पंचरत्नों की मेहनत से 2018 में कांग्रेस के कब्जे वाली मेहगांव, ग्वालियर, पोहरी, बामोरी, मुंगावली, सांची, बदनावर, अनूपपुर, सुवासरा, सांवेर, सुरखी, अम्बाह, भांडेर, अशोक नगर, मलहरा, हाटपिपल्या, मांधाता, नेपानगर और जौरा को जीतने में कामयाब रही। वहीं कांग्रेस मात्र 9 सीट ही जीत पाई। जिनमें सुमावली, मुरैना, दिमनी, गोहद, डबरा, ग्वालियर पूर्व, करैरा, ब्यावरा और आगर शामिल हैं।

बीजेपी को ऐतिहासिक चुनावी सफलता मिलने के बाद मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान फिर प्रदेश में नंबर वन नेता बनकर उभरे हैं। परिणामों ने साबित कर दिया कि मध्य प्रदेश में शिवराज की लोकप्रियता सबसे अधिक है। विपरीत परिस्थितियों में हुए उपचुनाव में बीजेपी को भी उम्मीद नहीं थी कि वह इतनी बड़ी जीत हासिल कर पाएगी। क्योंकि इस उपचुनाव में कोरोना, आर्थिक मंदी, बगावत, भितरघात के साथ ही बीजेपी को कई मोर्चों पर लडऩा पड़ रहा था। ऐसे में बीजेपी के पंचरत्न यानी शिवराज सिंह चौहान, ज्योतिरादित्य सिंधिया, नरेंद्र सिंह तोमर, वीडी शर्मा और नरोत्तम मिश्रा के साथ ही पार्टी के संगठन की जमीनी मेहनत का बराबर योगदान रहा है।

इस जीत में जितना शिवराज, प्रदेश अध्यक्ष वी डी शर्मा का योगदान है उतना ही नए नवेले भाजपाई ज्योतिरादित्य सिंधिया का भी है। उपचुनाव में न केवल उनकी साख दांव पर लगी थी बल्कि उनके आगे के सियासी सफर का रास्ता भी इसी नतीजे से निकलना था। ये बीजेपी की संगठित रणनीति का ही हिस्सा रहा !

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