पांच पूर्व न्यायिक अधिकारियों को सेवानिवृत्ति के लाभ दें – सुप्रीम कोर्ट

नई दिल्ली : सुप्रीम कोर्ट ने तमिलनाडु सरकार को पांच पूर्व न्यायिक अधिकारियों को सेवानिवृत्ति के लाभ देने का आदेश सुनाया है। इन सभी को 14 फरवरी, 2002 को हाई कोर्ट ने अतिरिक्त जिला एवं सेशन जज के रूप में नियुक्त किया था। इनकी नियुक्ति अस्थायी तौर पर फास्ट ट्रैक अदालतों के लिए की गई थी। उस समय पांचों व्यक्ति तमिलनाडु बार से बतौर अधिवक्ता जुड़े हुए थे। बाद में अलग-अलग कारणों से इन्हें पदमुक्त कर दिया गया था।

जस्टिस एके सीकरी और अशोक भूषण की पीठ ने इस संदर्भ में मद्रास हाई कोर्ट के एक अप्रैल, 2015 के आदेश को पलट दिया। हाई कोर्ट ने इन पांचों अधिकारियों के पेंशन के दावे को खारिज कर दिया था। याचिकाकर्ताओं के. अनबजगन और पीजी राजगोपाल को 60 वर्ष की उम्र होने के बाद पदमुक्त किया गया था। वहीं तीन अन्य अधिकारियों सेल्वी जी. सावित्री, आर. राधा और एएस हसीना को हाई कोर्ट ने उस वक्त पदमुक्त कर दिया था, जब फास्ट ट्रैक अदालतों को अतिरिक्त जिला जजों की स्थायी अदालत में बदल दिया गया। पदमुक्त करने के बाद पांचों ने रेगुलर कैडर में लेने की अपील की थी, जिसे हाई कोर्ट ने नामंजूर कर दिया था।

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